ये हैं गिर की ‘शेरनियां’, निडर होकर करती हैं अभयारण्य की रखवाली

11:44 am 10 Mar, 2016

आपने गिर अभयारण्य के शेरों के बारे में तो सुना ही होगा। आज हम आपका परिचय कुछ उन ‘शेरनियों’ से करवाने जा रहे हैं, जो निडर होकर बिना थके हुए इस अभयारण्य की रक्षा में जुटी हुई हैं। जी हां, रात हो या दिन ये न केवल शेरों की रक्षा करती हैं, बल्कि उनके छोटे बच्चों की देखभाल भी करती हैं।

फॉरेस्ट डिपार्टमेन्ट में महिलाओं के नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू हुई थी वर्ष 2007 में। इस विभाग में गुजरात सरकार ने महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की थी और इसके बाद कई महिलाओं ने इस काम को करियर के रूप में अपनाया।

महिलाओं ने यह साबित किया है कि वे किसी भी मामले मे पुरुषों से कम नहीं हैं।

रसीला वधेर, जो जानवरों के लिए राहत और बचाव दल की प्रमुख हैं, के सामने नौकरियों के अन्य विकल्प भी खुले थे। इसके बावजूद उन्होंने सुरक्षित डेस्क की नौकरी के बजाय इस काम को करना बेहतर समझा।

रसीला की तरह ही यहां और भी कई महिला कर्मचारी हैं, जो आसान जिन्दगी जी सकतीं थीं, लेकिन उन्होंने गिर को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी लेने को उचित समझा था।

हाल ही में डिस्कवरी चैनल ने इन महिलाओं को समर्पित एक डॉक्युमेन्ट्री चलाई थी। इसका शीर्षक था ‘लॉयन क्वीन्स ऑफ इन्डिया‘।


रसीला वधेर अब तक करीब 200 शेरों को बचा चुकी हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि शेर गड्ढे में गिर जाते हैं उन्हें बचाने के लिए ठीक उनके सामने खड़ा होना पड़ता है।

टाइम्स ऑफ इन्डिया को दिए गए एक साक्षात्कार में रसीला ने कहा कि शादी से पहले ही उन्होंने अपने पति को बता दिया था कि वह जंगलों में देर तक दूसरे लोगों के साथ काम कर रही होंगी। दरअसल, रसीला का कहना था कि वह शादी को दरकिनार कर सकतीं थीं, लेकिन इस काम को नहीं।

एक अन्य महिला अधिकारी किरण पठीजा गिर के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हैं। वह अपने मोटरसायकिल पर यह तलाशने निकलती हैं कि कहीं कोई शेर परेशानी में तो नहीं है। वह अब तक 19 शेरों को बचा चुकी हैं।

यही नहीं, किरण ने एक ऐसी शेरनी को बचाया था जो गर्भवती थी और बाद में 5 शावकों को जन्म दिया था। इस दौरान किरण भी गर्भवती थीं, इसके बावजूद वह काम पर जुटीं रहीं।

गिर की सुरक्षा टीम में फिलहाल 43 महिलाएं हैं, जो तमाम कठिनाइयों के बावजूद अपने काम पर लगी हुई हैं।

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