नहाने लायक भी नहीं बचा है हरिद्वार में गंगा का पानी

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5:45 pm 18 May, 2017

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हरिद्वार में गंगाजल स्नान के लायक भी नहीं है। एक आरटीआई के जवाब में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का कहना है कि हरिद्वार में गंगा नदी का पानी तकरीबन हर पैमाने पर असुरक्षित है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि उत्तराखंड में गंगोत्री से लेकर हरिद्वार जिले तक 294 किलोमीटर के इलाके में फैलीे11अलग-अलग जगहों से पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए सैम्पल लिए गए थे।

हरिद्वार के नजदीक के इलाकों के गंगाजल में BOD, कॉलिफॉर्म और अन्य जहरीले तत्व पाए गए हैं।

294 किलोमीटर तक के क्षेत्र में गंगाजल की गुणवत्ता की जांच के चार प्रमुख सूचक रहे हैं, जिनमें तापमान, पानी में घुली ऑक्सिजन, बायलॉजिकल ऑक्सिजन डिमांड और कॉलिफॉर्म शामिल हैं।

गंगाजल में नहाना क्यों है खतरनाक ?


CPCB के मानकों के मुताबिक, नहाने के एक लीटर पानी में BOD का स्तर 3 मिलीग्राम से कम होना चाहिए, जबकि यहां के पानी में यह स्तर 6.4 मिलीग्राम से अधिक पाया गया। कई जगहों के पानी में कॉलिफॉर्म भी काफी ज्यादा पाया गया। प्रति 100 मिलग्राम पानी में कॉलिफॉर्म की मात्रा जहां 90 MPN (मोस्ट प्रॉबेबल नंबर) होना चाहिए, वहीं यह मात्रा 1,600 MPN तक रही है। हरिद्वार के गंगाजल में DO का स्तर भी 4 से 10.6 मिलीग्राम तक पाया गया, जबकि स्वीकार्य स्तर 5 मिलीग्राम का है।

माना जा रहा है कि लगातार औद्योगीकरण तथा पर्यटन की वजह से हरिद्वार तथा आसपास के इलाकों में गंगाजल में प्रदूषण बढ़ा है। यहां न तो सीवेज ट्रीटमेन्ट प्लान्ट हैं और न ही पानी की गुणवत्ता पर नजर रखने का कोई तरीका।

बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की वजह से भी यहां गंगाजल में प्रदूषण बढ़ा है। यहां प्रतिदिन करीब 1 लाख लोग अलग-अलग घाटों पर गंगा में स्नान करते हैं।

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