मुंबई विश्वविद्यालय की किताब में गांधी और तिलक ‘साम्प्रदायिक’

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2:30 pm 21 May, 2016


मुंबई विश्वविद्यालय में पढ़ाई जा रही राजनीति शास्त्र की किताब विवादों में घिर गई है। दरअसल, इस किताब में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को साम्प्रदायिक और सेक्युलर विरोधी बताया गया है।

वहीं मुस्लिम लीग के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का गुणगान करते हुए उन्हें सेक्युलर बताया गया है। राजनीति शास्त्र की यह किताब मुंबई विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा योजना के तहत एमए पाठ्यक्रम में पढ़ाई जा रही है।

इस किताब में भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महात्मा गांधी के योगदान को दुर्भाग्यपूर्ण और भारत के बंटवारे के जिन्ना के फैसले को तार्किक ठहराया गया है। साथ ही वामपंथी दलों को छोड़कर अन्य पार्टियों को सांप्रदायिक बताया गया है।

“मार्डन इंडियन पॉलिटिकल थॉट” नामक शीर्षक की इस किताब में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर कोई अध्याय नहीं है, जबकि वामपंथई नेताओं पर कई अध्याय हैं।


बाल गंगाधर तिलक के बारे में बताते हुए इस किताब में लिखा है कि उन्होंने महाराष्ट्र में गणेश उत्सव की शुरुआत की थी। उन्होंने धर्म और राजनीति का घालमेल कियास इसलिए वह धर्मनिरपेक्ष विरोधी हैं।

वहीं, किताब में महात्मा गांधी के बारे में लिखा है कि उनके हिंदुओं के प्रति झुकाव ने जिन्ना को इतना गुस्सा दिलाया कि वह नासिर्फ कांग्रेस बल्कि देश छोड़ने को भी तैयार हो गए।

दूसरी तरफ जिन्ना का महिमामंडन करते हुए लिखा गया है कि वह एक सच्चे राष्ट्रवादी और सेक्युलर नेता थे। किताब के मुताबिक, गांधी और कायदे आजम के बीच हुई अहंकार की लड़ाई में जिन्ना को पाकिस्तान बनाने की जिम्मेदारी लेनी पड़ी।

जागरण की इस रिपोर्ट में मुंबई विश्वविद्यालय के नागरिक और राजनीति शास्त्र के प्रमुख सुरेंद्र जोधाले के हवाले से बताया गया है कि इस पुस्तक की विषय सामग्री को लेखकों के एक दल ने तैयार किया है। उनका कहना है कि यह पाठ्यक्रम का एक संकेत भर है। छात्रों को इस पर पूरी तरह से निर्भर नहीं होना चाहिए।

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