आपके जीवन को खुशियों से भर देंगे ये 12 सूत्र

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10:21 am 19 Dec, 2015


भौतिक जीवन की सारी सुख-सुविधाओं के बाद भी हममें से अधिकतर लोग दुःखी व अशांत हैं। दुनिया भर के सभी पंथ, धर्मं, दर्शन यही कहते हैं की खुशी हमारे चारों ओर हैं। यहां तक की हमारे भीतर ही कहीं छुपी हुई होती है। फिर क्यों हम उसे खोज पाने में असफल रहते हैं? इसका कारण है आपका ‘दृष्टिकोण’ जो खुशी के वृहद् कोणों में नजर डाल ही नहीं पाता। इन 12 छोटे-छोटे सूत्रों को अपना कर देखिए,आप अवश्य फील करेंगे और खुल के कहेंगे मैंने अब है जीना सीख लिया।

1. दूसरों को देना सीखिए। इससे आप ये पहलू भी देख पाएंगे कि आपने दूसरों से क्या पाया है।

2. किसी भी तरह का एकतरफ़ा फैसला लेने से बचिए। एकतरफा फैसले अक्सर स्वार्थ में न्याय को परे रखकर लिए जाते हैं, जो किसी के हित को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। किसी को दुःख पहुंचा आप खुश नहीं रख सकते। हर कंडीशन में स्थिर और शांत रहने का प्रयास करिए।

3. हमेशा अन्य को प्रोत्साहित करिए। दूसरों को उनके सद्गुणों के बारे में बताइए, फिर देखिए वे अपने आप ही स्वयं को मूल्य-निष्ठ बनाए रखने का प्रयास करेंगे।

4. अपने जीवन को ‘भविष्य की चिंता’ और ‘भूतकाल की गलतियों’ में मत उलझाइए। खुश रहिए और वर्तमान को ईमानदारी से निभाइए।

5. ज्यादा सीरियस मत रहिए। अपनी दिनचर्या का छोटा सा हिस्सा हंंसने-हंसाने के लिए भी रखिए। यदि आप प्यार और ख़ुशी बांटेंगे, तो निश्चित रूप से वो वापस आपको दुगने रिटर्न्स के साथ मिल जाएगी।

6. आभार जताने का अभ्यास करें। याद रखिए कोई,किसी की भी दुआ और आशीर्वाद आपको हर तरह की नकारात्मकता से बचाती है।

7. लोग आपके बारे में क्यों नहीं सोचते। कैसा सोचते हैं या फिर क्या सोचते हैं!! इसमें अपना समय बर्बाद मत करिए, क्योंकि किसी के ‘सोचने’ को सोचने से क्या कुछ हांसिल हो सकता है?

8. अपने प्रति ईमानदार बने रहिए मतलब खुद को भी नैतिकता के तराजू में तोलिए। भले ही ये आपको असहज लगे। यह आपको सामजिक रूप से जिम्मेदार बना देगा।

9. हर किसी से संतुलित व्यवहार रखने का अभ्यास करिए। ध्यान रखिए आपका व्यवहार सामने वाले के विचारों को प्रत्यक्ष प्रभावित करता हैं।

10. किसी के भी जीवन का अनुसरण मत करिए। हर किसी का जीवन अलग होता है। योग्यता, देश, काल और पात्र के अनुसार ही नापी जा सकती है। अक्सर हम कम्पेरिजन की बीमारी की वजह से अवसाद ग्रसित हो जाते हैं। स्वयं को पहचानिए और तराशिए। आप पाएंगे की “आप सर्वश्रेष्ठ हैं।”

11. अपनी जिम्मेंदारियों से कभी पल्ला मत झाड़िए, क्योंकि पलायन कभी स्थायी इलाज नहीं हो सकता।

12. आपके आस-पास एक शक्ति का बहुत बड़ा सोर्स होता है, जो है आपका सकारात्मक रवैया। इसलिए इसे हमेशा बनाए रखिए ताकि आपकी आनंद और खुशियों की बगिया हरी-भरी बनी रहे।

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