इस किसान ने बंजर ज़मीन को बना दिया उपजाऊ; अब उगाते हैं कई तरह की सब्जियां

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4:19 pm 23 Dec, 2015

कहते है अगर इरादे दृढ़ हों तो क्या कुछ नहीं हो सकता। जिस ज़मीन में कुछ भी उगाना नामुमकिन सा था, वहां एक किसान ने अपनी मेहनत, सूझ-बूझ से कमाल कर दिखाया। यह वाकया है, खरसिया विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम नहरपाली का, जहां किसान सुन्दरलाल ने खेती कर बंजर ज़मीन में भी जान फूंक दी।

सुन्दरलाल ने बंजर ज़मीन और आसपास के औद्योगिक प्रदूषण की मार झेल रहे नहरपाली इलाके में, जहां सामान्य वनस्पति भी नहीं उग पाती, वहां ग्रीन हाउस बनाकर अपने खेतों पर सब्जी उगाने का फैसला किया।

इस इलाके की ज़मीन की उपजाऊ शक्ति अपेक्षाकृत कमजोर होने के कारण यहां धान, तिलहन जैसी फसलों की पैदावार न के बराबर होती है। लेकिन सुन्दरलाल ने यहां ग्रीन हाउस का निर्माण कर टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा, फूल गोभी जैसी कई सब्जियां उगाई है, बल्कि उन्होंने अपने इस कार्य को आगे बढ़ाते हुए दो एकड़ के खेत में ग्रीन हाऊस का निर्माण कराया है।

नहरपाली की ज़मीन खेती के अनुरूप नहीं मानी जाती। यहाँ इस इलाके में कई उद्योग है, नज़दीकी उद्योगों के कारण होने वाले प्रदुषण की वजह से यहाँ फसल नहीं उगती।

लेकिन सुन्दरलाल ने इसके बावजूद इस बंजर ज़मीन में फसल उगाने का निश्चय किया। शुरुआत में मुश्किलें आई, घाटे का सामना भी करना पड़ा। लेकिन इन बातों से बिना हार माने उन्होंने अपने कार्य के दायरों को और आगे बढ़ाया।


सुन्दरलाल की इसी लगन ने उन्हें आज अपने इलाके का एक सफल किसान बना दिया है। आज उनकी गिनती इलाके के बड़े किसानों में होने लगी है। सुन्दरलाल कहते है कि इस ग्रीन हाउस के विचार से उनका सब्जियों का उत्पादन दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, जिस कारण उनकी आर्थिक स्थिति पहले से कई मज़बूत हुई है। क्षेत्र के दूसरे किसान भी अब सुन्दरलाल के खेती करने के तरीके को अपनाने में लगे हुए हैं। सुन्दरलाल कहते हैंः

“मेरी जमीन पूरी तरह से बंजर थी। घास भी नहीं उगता था, लेकिन देसी खाद के इस्तेमाल और ग्रीन हाऊस के निर्माण के बाद सब्जी की पैदावार काफी बढ़ गई हैं। क्षेत्र के दूसरे किसानों को होने वाली समस्या ग्रीन हाउस के जरिए दूर हो सकती हैं।”

फसल की उपज बढ़ाने के लिए सुन्दरलाल रासायनिक खाद के बजाय गोबर खाद का प्रयोग करते है। खाद को लेकर कोई समस्या न आए इसके लिए सुन्दरलाल ने करीबन एक दर्जन गाएं पाल रखी हैं।

आज सुन्दरलाल जिस मुकाम पर है वो उसने अपने परिश्रम और एक लाभकारी सोच के साथ हासिल किया है। जिस ज़मीन में एक पौधा तक न उगता था, उस ज़मीन को सुन्दरलाल ने उपजाऊ बना दिया।

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