दिल्ली यूनिवर्सिटी की किताब में शहीद भगत सिंह को बताया गया ‘आतंकवादी’

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4:14 pm 27 Apr, 2016


दिल्ली यूनिवर्सिटी की किताब में एक बड़ी तथ्यात्मक गलती सामने आई है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदी माध्यम कार्यान्वयन निदेशालय की तरफ से प्रकाशित ‘भारत का स्वतंत्रता संघर्ष’ पुस्तक के एक अध्याय में भारतीय क्रांतिकारी भगत सिंह को आतंकवादी कहकर सम्बोधित किया गया है।

भगत सिंह के परिजनों ने इसका कड़ा विरोध किया है। वहीं, कई इतिहासकार और नेताओं ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है।

अंग्रेजी हुकूमत को झकझोर कर रख देने वाले ‘चटगांव कांड’ को इस किताब में एक ‘आतंकी घटना’ करार दिया गया है। वहीं, सांडर्स की हत्या को भी ‘आतंकवादी घटना’ के तौर पर लिखा गया है।

पुस्तक के 20वें अध्याय में शहीद भगत सिंह और उनके साथियों सूर्य सेन, चंद्र शेखर आजाद और कईयों को ‘क्रांतिकारी आतंकवादी’ कहकर सम्बोधित किया गया है।

भगत सिंह के भांजे अभय सिंह संधू का इस पूरे मामले को लेकर कहना है:

“भगत सिंह आंतकवादी नहीं थे। उन्हें सजा देने वाले जजों ने अपने फैसले में उन्हें ट्रू रिवोल्यूनशरी (सच्चा क्रांतिकारी) बताया था। कही भी आंतकवाद की बात नहीं आई। संधू ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से किताब वापस लेने की मांग की।”

इस पुस्तक का पहला संस्करण 1990 में प्रकाशित हुआ था। यह किताब मशहूर इतिहासकार बिपिन चंद्र, मृदुला मुखर्जी, आदित्य मुखर्जी व सुचेता महाजन ने मिलकर लिखी है।

भगत सिंह के छोटे भाई सरदार कुलबीर सिंह के पोते यादवेंद्र सिंह ने इस पुस्तक में संशोधन को लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखा है।

भगत सिंह के परिजनों का कहना है कि इस पुस्तक में जगह-जगह भगत सिंह को आतंकवादी कहकर संबोधित किया गया, जिससे सभी लोग आहत हैं। किताब से उस शब्द को हटाया जाए।

इससे पहले NCERT की किताब में भी भगत सिंह को आतंकवादी कहा गया था। जिसमें भगत सिंह ने जो भी कुछ किया था उसे ‘क्रांतिकारी आतंकवाद’ बताया गया था।

bhagat singh


इस तथ्यात्मक गलती के सामने आने के बाद इसका कड़ा विरोध हो रहा है, इतिहासकारों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द से जल्द पुस्तक की गलतियों को हटाने की मांग की है।

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