85 साल के बुजुर्ग पिछले 57 साल से अकेले ही कर रहे हैं अपनी लकवाग्रस्त पत्नी की सेवा

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5:48 pm 28 Nov, 2016


युगों से चली आ रही प्रेम कहानियां आज भी हमारे एहसासों के किसी तह में समर्पण, विश्वास और वचनबद्धता के पुल का निर्माण करती हैंप्रेम वह ऊर्जा है, जो न तो किसी परिस्थिति का आकलन करती है और न ही इसे किसी घड़ी की सुइयों में  क़ैद किया जा सकता है। बल्कि यह स्वतः अपने निर्मल प्रकाश से इस धरा को निरंतर पल्लवित, पुष्पित और फलित करती रहती है।

कुछ ऐसी ही कहानी है, चीन के रहने वाले 85 साल के दू  युअंफा की। उनकी कहानी एक पल के लिए मार्मिक ज़रूर है परंतु ठीक दूसरे ही पल इनके प्रेम की अनुभूति अपने आपमें विरल, अद्वितीय और बेजोड़ है।

समर्पण का सही अर्थ बताने वाले दू युअंफा पिछले 57 सालों से अपनी लकवाग्रस्त पत्नी की बिना थके और बेहद विनम्रता से सेवा करते चले आ रहे हैं। तो आइए आज उनके इस अद्वितीय नि:स्वार्थ प्रेम से रूबरू होते हैं।

चीन के शेडोंग प्रांत से ताल्लुक रखने वाले दू युअंफा, सुंजिययो गांव में अपनी पत्नी ज़ू यूआई के साथ रहते हैं। युअंफा अपनी पत्नी ज़ू के बिस्तरग्रस्त होने से पहले एक कोयले की खान में काम करते थे। उनके खुशहाल ज़िंदगी में साल 1959 किसी भूचाल की तरह आया। दरअसल, उनकी प्रिय पत्नी को एक अज्ञात बीमारी ने संक्रमित कर दिया, जिसके फलस्वरूप वे चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गईं। तब ज़ू यूआई 20 साल की एक नौजवान युवा थी।

इस त्रासदी से मात्र 5 महीने पहले ही युअंफा और ज़ू यूआई ने शादी रचाई थी। प्रकृति की इस क्रूर करनी के बावजूद युअंफा ने इस अनमोल प्रेम डोर को टूटने नहीं दिया। आज युअंफा अपनी पत्नी के प्रेम की अनूठी बैशाखी ही नहीं, बल्कि उनकी परम शक्ति भी है।

हालांकि, युअंफा ने अपनी पत्नी को लेकर कई अस्पतालों में उनके पुन: स्वस्थ हो जाने की कामना से भटके। उन्होंने हर संभव प्रयास किया लेकिन निदान सिर्फ़ एक ही अनिवार्य निष्कर्ष पर पहुंचते थे कि ज़ू यूआई कभी चल-फिर नहीं सकती।

जीवन की इस विचित्र परिस्थिति में मदद के लिए हालांकि उनके दोस्त-संबंधी सब युअंफा के साथ थे। लेकिन उन्होंने यह तय कर लिया था कि ज़िंदगी की यह जंग वे अकेले अपनी पत्नी के साथ लड़ेंगे। वे हमेशा अपनी पत्नी का ढांढस बढ़ाते हुए कहते हैं।

“तुम घबराना मत, मैं तुम्हारा हमेशा ख्याल रखूंगा।”


57 साल बीतने के बाद भी युअंफा अपने दृढ़ निश्चय से रत्ती भर भी नही बदले। बल्कि समय के साथ उनका यह प्यार का रिश्ता और भी मजबूत हो गया है। पिछले 57  सालों  से वे खुद अपनी पत्नी का देखभाल कर रहे हैं। उनके लिए खुद खाना पकाते हैं। घर के सारे काम करते हैं। अपने हाथो से ज़ू यूआई को खाना खिलाते हैं। नियमित दवाइयों का ध्यान रखते हैं। क्या ऐसा प्रेम का अनूठा बंधन आज के दौर में देखने को मिलता है, जब उनकी पत्नी के स्वस्थ होने का ख्याल नाउम्मीदी से ज़्यादा कुछ न हो।

परंतु  युअंफा की उम्मीद अभी भी नही टूटी है। उन्हे विश्वास है एक दिन फिर से उनकी पत्नी चलने लगेंगी। इसलिए जब कभी भी वे किसी हर्बल दवा या जड़ीबूटी के बारे में सुनते हैं, तो उसकी तलाश में सुदूर पहाड़ों को छान ढालते हैं। यही नही उन जड़ीबूटियों से निर्मित दवा को अपनी पत्नी को पिलाने से पहले उसका सेवन खुद करते हैं, सिर्फ़ इसलिए कि कहीं जड़ीबूटियां उनकी पत्नी के स्वास्थ के लिए घातक न हो।

कहते हैं शादी का बंधन एक प्रेम के डोर में बंधा होता है, जिसे अटूट विश्वास और वादे के साथ निभाना पड़ता है। अक्सर उन वादों के पवित्र डोर को अहंकार और असुविधा की पीड़ा में कमजोर पड़ता देखा है। ज़ू यूआई उम्र के इस ढलते पड़ाव के साथ शायद दोबारा कभी चल-फिर, हिल-डुल  नही पाएंगी, लेकिन इतना स्पष्ट है कि वे जीवित महिलाओं में सबसे भाग्यशाली पत्नी हैं, जो उन्हें इतने समर्पण के साथ निःस्वार्थ प्रेम करने वाला पति युअंफा मिला। इन दोनो के इस अद्वितीय प्रेम को टॉपयॅप्स टीम दुआ के साथ सलाम करती है।

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