रियो पैरालंपिक्स में दिव्यांग देवेंद्र झाझरिया ने भारत को दिलाया स्वर्ण पदक

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1:19 pm 14 Sep, 2016


भारतीय पैरा एथलीट देवेंद्र झाझरिया ने इतिहास रचते हुए रियो पैरालंपिक्स में भाला फेंक प्रतियोगिता में देश के लिए स्वर्ण पदक जीता है।

पैरालंपिक में यह उनका दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले 2004 के एथेंस पैरालंपिक में देवेंद्र ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।

देवेंद्र ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए यह पदक हासिल किया है। उन्होंने 63.97 मीटर दूर भाला फेंक कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। देवेंद्र का पिछला रिकार्ड 62.15 मीटर का था जो उन्होंने एथेंस ओलंपिक में बनाया था।

विश्व रैंकिंग में तीसरी वरीयता प्राप्त देवेंद्र एकमात्र ऐसे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने दो पैरालम्पिक खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।

राजस्थान में जन्मे देवेंद्र आठ साल की उम्र में पेड़ पर चढते हुए बिजली के तारों की चपेट में आ गए थे। जिस कारण उन्हें अपना बायां हाथ गंवाना पड़ा। इसके बावजूद खेल के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ। उन्होंने 2004 में अर्जुन और 2012 में पद्मश्री पुरस्कार जीता। वह यह सम्मान पाने वाले पहले पैरालंपियन बने।


इस स्वर्ण पदक के साथ ही रियो पैरालंपिक में भारत के कुल पदकों की संख्या 4 हो गई है, जिसमें 2 स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य है। देवेंद्र से पहले हाई जम्प में मरियप्पन थंगावेलु ने गोल्ड और वरुण सिंह भाटी ने कांस्य पदक जीता। दीपा मलिक ने एक दिन पहले शॉटपुट में रजत जीता था।

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