बेटा नहीं आया मां की लाश को कंधा देने, बेटियों ने निभाया बेटों का फर्ज़

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3:30 pm 6 Apr, 2016


जब बच्चा बीमार पड़ता है, तो मां कैसे आपका ख्याल रखती है। रात-रात भर जागकर आपको देखती है कि आप ठीक तो हैं, लेकिन जब वही बच्चा बड़ा होकर अपनी मां की अनदेखी करता है, यहां तक कि उसकी चिता को अग्नि देने से मना कर देता है, तो ज़रा सोचिए उस मां की आत्मा को कितनी ठेस पहुंचती होगी।

उड़ीसा के बारगाह जिले में जो देखने को मिला वो वाकई दिल को छलनी कर देता है। एक महिला, जो कुष्ठ रोग से पीड़ित थी, को उनका अपना बेटा भी कंधा देने नहीं आया।

गांव वालों में से भी कोई मर्द उन्हें शमशान तक कन्धा देने के लिए राज़ी नहीं हुआ। कई घंटे बीत गए, जब कोई भी कन्धा देने सामने नहीं आया तो आखिरकार महिला की बेटियों ने अपनी मां देई प्रधान को कंधा दे कर उन्हें शमशान तक पहुंचाया। यहां तक कि अंतिम संस्कार की सारी क्रियाएं खुद ही पूरी की।

बेटियों ने पास ही के गांव में रह रहे अपने भाई को मां के गुज़र जाने की खबर दी थी, लेकिन वह अपनी मां को कंधा देने के लिए नहीं आया। उसने अपना फर्ज नहीं निभाया और मां को अछूत समझ बैठा। लेकिन बेटियों ने अपने फ़र्ज़ को बखूबी अदा किया।


अपनी मां को कंधा देने वाली दोनों बेटियां चंद्रकांती और रोजी ने बताया कि कैसे गांव का एक भी आदमी उनकी मां को कन्धा देने नहीं आया।

शमशान ले जाने के लिए करीब 9 घंटे तक इंतजार करने के बाद दोनों बहनों चंद्रकांती, रोजी और चंद्रकांती के पति ने मिलकर उन्हें कंधा दिया। चंद्रकांती ने बताया कि उनके समाज में महिलाएं अर्थी को कंधा नहीं देती हैं, लेकिन समाज ने उनके सामने और कोई विकल्प छोड़ा ही नहीं।

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