दलित होने के कारण घोड़ी पर नहीं बैठ सका दूल्हा, प्रशासन से ली थी इजाजत

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5:51 pm 20 Jan, 2016

राजस्थान के पाली के खिमाड़ा गांव की सीआईएसएफ कांस्टेबल नीतू मेघवाल की शादी में उसके पति को दलित होने के कारण घोड़ी पर नहीं चढ़ने दिया गया। यहां तक कि दूल्हे को घोड़ी पर चढ़ने देने की इजाजत प्रशासन से ली गई थी और अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद ऐसा नहीं हो सका।

नीतू ने प्रशासन को लिखा था कि उसकी शादी में दूल्हा घोड़ी पर बैठकर आए। इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय को भी पत्र लिखा गया था। जिला प्रशासन के निर्देश पर अधिकारी खिमाड़ा गांव में पहुंच गए थे। नीतू का दूल्हा प्रवीण भार्गव भी बरात लेकर खिमाड़ा गांव पहुंच गया।

प्रशासन ने घोड़ी भी मंगवा ली थी लेकिन कुछ सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इसका विरोध करते हुए रोष जताया। साथ ही, उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। हालात ऐसे हुए कि दूल्हे को बिना घोड़े पर चढ़े ही विवाह की रस्म अदायगी करनी पड़ी।


हालांकि, कई जिलों से पहुंचे समाज के लोगों ने दावा किया कि तोरण की रस्म पूरी होने के बाद घोड़ी पहुंची। जानबूझकर घोड़ी देरी से मंगाई, प्रशासन खुद इस मामले को लेकर दबाव में था।

नीतू केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ ) में कांस्टेबल है। उसकी तैनाती बेंगलूरू हवाई अड्डा पर है। राजस्थान अतीत में जातीय हिंसक घटनाओं का गवाह रहा चुका है। विशेष रूप से भीलवाड़ा अलवर और जयपुर के कुछ हिस्सों में।

खिमाड़ा राणावत ग्राम पंचायत के उपसरपंच महेंद्रसिंह राणावत का इस मामले को लेकर कहना था कि बिंदौली से लेकर शादी की रस्म पूरी होने तक वह मौजूद थे। उन्होंने किसी तरह का दबाव होने से इन्कार किया।

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