CRPF के जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर की गर्भवती महिला की मदद

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4:33 pm 19 Apr, 2016


मानवता का परिचय देते हुए, बिना अपनी जान की परवाह किए बगैर, CRPF के जवानों ने बस्तर में फैले आतंक के माहौल के बीच एक मां और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को बचाने में अहम भूमिका अदा की।

यह जवान इस महिला को बस्तर में कदम-कदम पर पसरी दहशत, कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए चिंतलनार से दोरनापाल लेकर आए। अब गर्भवती महिला CRPF के डॉक्टरों की निगरानी में है, जहां महिला और कोख में पल रहे बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जा रही है।

आपको बता दें कि नक्सली बस्तर में आंदोलन चला रहे हैं, जिसमें वह आदिवासियों के अधिकारों की जंग लडऩे का दावा कर रहे है।

नक्सलियों के आंदोलन का खामियाजा एक आदिवासी महिला भीमें को चुकाना पड़ता अगर CRPF के जवान सही समय पर नहीं पहुंचते। वहीं मां और बच्चे दोनों की जान को भी खतरा हो सकता था।

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गर्भवती महिला को CRPF के जवान रात चिंतलनार के अंदरुनी गांव मोरपल्ली से विकट परिस्थितियों में चिंतलनार के कैंप लेकर आए। वहां उसकी हालत बिगड़ती चली गई। बाद में प्रसव पीड़ा झेल रही आदिवासी महिला भीमें को CRPF के जवानों ने अस्पताल पहुंचाने का जिम्मा अपने कंधों पर लिया।

रात में ही महिला को एम्बुलेन्स से, चिंतलनार से दोरनापाल अस्पताल रवाना किया गया, लेकिन हालात बेहद ही विकट थे। नक्सलियों ने बंद के दौरान रास्ते में जगह-जगह विस्फोट कर सड़कों को बंद कर दिया था। CRPF के ये जांबाज़ जवान माओवादी वारदातों से भयभीत नहीं हुए और महिला को सुरक्षित दोरनापाल अस्पताल पहुंचाया।

कहते है इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। जहां आदिवासियों के हक़ की लड़ाई का दावा करते हुए नक्सलियों ने जगह-जगह उत्पात मचा रखा है। उसी बीच एक आदिवासी महिला की मदद के लिए CRPF के जवान रात के अंधेरे में जान की बाजी लगाकर निकल पड़े।

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