मिलिए इस कश्मीरी जवान से जिसने भारत के लिए अपने सीने पर खाई 8 गोलियां

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7:09 pm 29 Aug, 2016


सीआरपीएफ के हेड कांस्टेबल खुर्शीद अहमद के लिए बीते दो महीने बिल्कुल भी आसान नहीं थे। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एमर्जेन्सी वॉर्ड के बिस्तर में पड़े इस जवान के लिए अपना शरीर भी हिला पाना मुश्किल था। दो महीने पहले जब उन्हें कश्मीर के पंपोर में हुए आतंकवादी हमले के दौरान 8 गोलियों लगी थी, तब उन्हे आइसीयू में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था।

आपको बता दें 25 जून को जब अहमद अपने कुछ अन्य सीआरपीएफ साथियों के साथ लेथपुरा से शूटिंग अभ्यास के बाद लौट रहे थे, तब अचानक 4 आतंकवादियों ने घात लगा कर हमला कर दिया था। इस हमले में आठ सीआरपीएफ जवानों की मौत हो गई थी और 22 जवान घायल हो गए।

41 वर्षीय अहमद पिछले 23 वर्षों से अपने देश की सेवा कर रहे थे। आठ गोलियां भी उनके साहस को बिखेर नही पाईं और एक बार फिर यह जवान देश की सेवा करने के लिए तैयार हैं।

“ठीक होने के बाद मैं ड्यूटी ज्वाइन करूंगा। इन गोलियों से नहीं डरता मैं। मैं एसटीएफ मैं रहा हूं। मैं कई आइजी, डीआइजी के साथ गनमैन रहा हूं। अभी तो कुछ भी नहीं है श्रीनगर में। उग्रवादी पहले थे। गोलियां चलती थी पीक पर। अब क्या है ? चार गोली मारी और भाग गए।”

अहमद को उनकी कमर और कंधों में कई गोलियों लगी थी, लेकिन फिर भी उन्होंने अपने हथियार नीचे नहीं डाले। उनका शरीर बुरी तरह से ज़ख्मी था, फिर भी उन्होंने लड़ाई जारी रखी।

“मुझे 8 गोली लग गई थी तब तक, लेकिन फिर भी मैं कम से कम एक घंटे तक मैं लड़ता रहा। मैनें आवाज़ मारी अपने साथ वालो को, मैने कहा कोई है, कोई नही बोला,  मैं चुप हो गया फिर। मैने ऐसे ही गर्दन उठाई, मैने सोचा अब क्या करू ? मेरे सामने से मिलिटंट आ रहा था,  मैने फायर करने की कोशिश की, मेरे हाथ को गोली लगी।”

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अहमद का गांव कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में है। उनका देशप्रेम उनके परिवार और जानने वालों से छुपा नही है। परिवार को विश्वास है कि अहमद का यह देशप्रेम आगे भी जारी रहेगा। इस सवाल पर कि ठीक होने पर अहमद क्या वापस अपनी ड्यूटी ज्वाइन करेगा? तो परिवार के एक सदस्य ने बतायाः

“हां, बिल्कुल जाएगा। बोल रहा था परसो ‘चाचा अगर मैं ठीक हो जाऊं तो बता दूं उनको, जिन्होंने मुझ पर फाइरिंग की।’

देश के ऐसे साहसी और वीर सपूत को मेरा सलाम जो मौत का चेहरा देखने के बाद भी देश सेवा धर्म निभाने से एक कदम भी पीछे नही हटते।

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