क्या पाकिस्तान की वजह से दरक रही है BRICS की दीवार?

1:06 pm 15 Oct, 2016


गोवा में बहुप्रतिक्षित व बहुप्रचारित BRICS शिखर सम्मेलन से ठीक एक दिन पहले चीन ने साफ कर दिया है कि वह भारत को न तो न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (NSG) में शामिल होने की रजामंदी देगा और न ही आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर पर प्रतिबंधों की उसकी कोशिशों को सफल होने देगा।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता गेंग शौंग का कहना है कि NSG के मुद्दे पर चीन का रुख बिल्कुल भी नहीं बदला है। चीन आज भी भारत के उस आवेदन का विरोध करता है, जिसके तहत उसने संवदेनशील न्‍यूक्लियर टेक्‍नोलॉजी को हासिल करने के लिए NSG की सदस्‍यता का मन बनाया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के इस बयान से यह साफ हो गया है कि चीन NSG के मसले पर एक बार फिर भारत की उम्मीदों पर पानी फेरेगा।

वहीं, दूसरी तरफ गेंग शौंग इस बात पर जोर देते हैं कि आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर पर प्रतिबंध के मसले को चीन ने दुनिया के सामने रखा है और संयुक्त राष्ट्र में अजहर के मुद्दे को जिस तरह से डील किया जा रहा है, वह नियमों के मुताबिक ही है।

15-16 अक्टूबर को BRICS का आठवां शिखर सम्मेलन गोवा में होने जा रहा है। भारत के अलावा इस समूह के चार अन्य देश चीन, रूस, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका ऐसे समय में एक साथ आ रहे हैं जब भारतीय उप महाद्वीप और पाकिस्तान के बीच संबंधों में बेहद तनाव है।

चीन के रवैए से लगता नहीं है कि आतंकवाद से मुकाबले के मामले में वह पाकिस्तान के खिलाफ कठोर बयान दे सकता है।


इसकी अपनी वजह भी है। आर्थिक मंदी के कठिन दौर से गुजर रहे चीन को पाकिस्तान में उम्मीद की किरण नजर आ रही है। पाकिस्तान ने कम्युनिस्ट चीन के महात्वाकांक्षी इकोनॉमिक कॉरीडोर के लिए खुद को एक तरह से उसके हवाले कर दिया है। चीन पाकिस्तान का भरपूर दोहन कहने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

वहीं, दूसरी तरफ भारत में लगातार हो रहे आतंकवादी हमलों के बीच चीन ने बार-बार अपने बयानों से और कारगुजारियों से यह साबित किया है कि वह पाकिस्तान का साथ दे रहा है। इस पर भारत सरकार ने भले से अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन देश में चीन का विरोध शुरू हो गया है।

भारतीयों ने चीन में बनी वस्तुओं के बहिष्कार की रणनीति अपनाई है, और यही वजह है कि चीन का सरकारी नियंत्रण वाला मीडिया भारत पर विफरा हुआ है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीयों द्वारा सोशल मीडिया पर चाइनीज उत्पादों के बहिष्कार का खासा असर हुआ है।

BRICS की स्थापना के आठ साल बीतने के बावजूद अब तक यह साफ हो नहीं हो सका है कि क्या यह समूह वाकई सही रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। इस समूह के दो बड़े देश भारत और चीन के बीच अगर अलग-अलग मुद्दों (जिनमें पाकिस्तान महत्वपूर्ण है) पर इस तरह मतभेद बने रहते हैं तो इस शिखर सम्मेलन का भला क्या औचित्य है।

अगर BRICS देशों की मौजूदा हालत पर गौर करें तो पता चल जाता है कि इस समूह में एकमात्र भारत ऐसा देश है जो अपने साढ़े सात फीसदी विकास दर के साथ उम्मीद की किरण लिए हुए है।

इस समूह के तीन अन्य देश घोर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। चीन जहां आर्थिक मंदी का शिकार है, वहीं ब्राजील और रूस में विकास दर नीचे की तरफ लुढक रही है।

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