केंद्रीय विद्यालय और इसके छात्रों के बारे में 18 बेहद दिलचस्प बातें

3:34 pm 2 Apr, 2016


आपने केन्द्रीय विद्यालय का नाम जरूर सुना होगा। आज हम आपको इस विद्यालय के बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में आपको शायद नहीं पता होगा।

1. केंद्रीय विद्यालय की स्थापना सन 1963 में हुई थी। उस समय इसे सेन्ट्रल स्कूल के नाम से जाना जाता था।

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2. केंद्रीय विद्यालय भारत की सबसे बड़ी स्कूलों की चेन में से एक है। इसकी तीन शाखाएं विदेशों में भी है।

 

3. सभी केंद्रीय विद्यालय भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित किए जाते हैं।

 

4. सितम्बर 2014 की गणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय विद्यालयों में सबसे अधिक छात्र पढ़ते हैं।

 

5. दिल्ली 1,01,564 छात्रों के साथ दूसरे नंबर पर है।

 

6. फरवरी 2015 की गणना के अनुसार भारत में 1099 केंद्रीय विद्यालय हैं।

 

7. सभी केंद्रीय विद्यालय 25 क्षेत्रों में विभाजित हैं। हर क्षेत्र के सभी केंद्रीय विद्यालय एक डिप्टी कमिश्नर के अधीन होते हैं।

 

8. केंद्रीय विद्यालय की विदेशी शाखाएं काठमांडू, तेहरान और मॉस्को में हैं। ये सभी शाखाएं भारतीय दूतावास के स्टाफ व प्रवासी भारतीय कर्मचारियों के बच्चों के लिए हैं।

 

9. सभी केंद्रीय विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक संस्कृत की पढ़ाई अनिवार्य है।

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10. जर्मन भाषा का चुनाव छात्रों के लिए स्वैच्छिक होता है।

 

11. केवल कक्षा 9 से ऊपर के लडकों से फीस ली जाती है।

 

12. केंद्रीय विद्यालय में सरकारी कर्मचारी के बच्चों और SC/ST वर्ग के छात्रों के लिए फीस माफ़ होती है।

 

13. आठ शाखाएं क्वालिटी काउंसिल ऑफ़ इंडिया (QCI) द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। इनमे से कुछ KV सेक्टर 8; आर के पुरम, नई दिल्ली; KV, IIT-Powai मुंबई और KV AFS, मनौरी इलाहाबाद हैं।

 

14. मार्च 2015 की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार भारत के 178 ज़िलों में एक भी केंद्रीय विद्यालय नहीं हैं।

 

15. केंद्रीय विद्यालय के प्रमुख लक्ष्यों में से एक है भारतीय सेना के जवानों के बच्चों की शैक्षणिक ज़रूरतों को पूरा करना।

 

16. सभी केंद्रीय विद्यालय शुरू से ही CBSE बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त हैं।

 

17. हर शाखा के सभी छात्र इन 4 गुटों में विभाजित किए जाते हैं – शिवजी, रमन, अशोक और टैगोर।

 

18. केंद्रीय विद्यालय का आदर्श वाक्य है ‘ज्ञानार्थ प्रवेश, सेवाव्रता प्रस्थान’। इसका अर्थ है ‘ज्ञान के लिए प्रवेश, सेवा के लिए प्रस्थान’

Sukanta Sarkar

 

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