इस बाज़ार में नोट से नहीं, बल्कि आधार कार्ड दिखाकर खरीद और बेची जा रही है सब्जियां

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4:47 pm 19 Nov, 2016

अगर आपसी सहयोग और सूझबूझ से काम लिया जाए तो ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिसका समाधान खोजा नहीं जा सकता। 500 और 1000 के पुराने नोटों की बंदी के बाद आम जनता को काफ़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जहां, एक तरफ बैंक और एटीएम के बाहर आमजनों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं, वहीं यह बाज़ार में पर्याप्त छोटे मुद्रा ना होने के कारण रोज़मर्रा के ज़रूरत का सामान खरीदने में भी दिक्कत हो रही है।

वहीं, हैदराबाद के कूकटपल्ली रायतू बाजार में माहौल कुछ और ही है। नोटबंदी का असर झेल रहे इस बाज़ार ने एक कारगर तरीका निकाल लिया है। इसके बाद यहां के ग्राहकों ने शुक्रवार को करीब 15 हजार रुपए की सब्जियां खरीदी हैं। लेकिन इसके लिए जो तरीका अपनाया गया है, वह एक मिसाल है।

आपको जानकार यह हैरानी होगी कि यहां सब्जियां नोटों से नहीं, बल्कि आधार कार्ड से खरीदी गई।

तेलंगाना स्टेट मार्केटिंग डिपार्टमेंट की पहल के तहत शुक्रवार को इंडस्ट्रियल डिवेलपमेंट फाइनैंशल कॉरपोरेशन के काउंटर बनाए गए, जहां करेन्सी की जगह लोगों को टोकन मुहैया करवाए गए। जिन ग्राहको का बैंक खाता उनके आधार कार्ड नंबर से जुड़ा हुआ है, उन्हें 5, 10 और 20 रुपए के टोकन दिए गए। ग्राहकों ने जितने भी रुपए की सब्जी ली उतने पैसे बाद में सीधे उन लोगों के बैंक अकाउंट से काट लिए गए। और जिन टोकनों का इस्तेमाल नहीं हो सका, उन्हें कैश के रूप में लोगों को दे दिया गया।

इस बेहतरीन सुविधा की वजह से किसानों और विक्रेताओं को हो रहा है फ़ायदा

पिछले कुछ दिनों में नोटबंदी का असर बाज़ारों में साफ़ देखने को मिला, लेकिन इस सुविधा की वजह से उन विक्रेताओं और किसानों को काफ़ी मदद मिल रही है, जो छोटे नोट उपलब्ध न हो पाने के कारण अपनी सब्ज़ियां बेच पाने में असहाय थे।


आपको बता दें कि इस सुविधा के अंतर्गत जिन किसान और विक्रेताओं ने टोकन के रूप में मुद्रा स्वीकार किया था, उनके खाते में रकम भेज दी गई है। यदि किसी के पास बैंक अकाउंट नहीं था, तो इन आईडीएफसी काउंटरों ने अकाउंट खुलवाने का भी काम किया गया है।

तेलंगाना के सिंचाई मंत्री टी. हरीश राव इस सुविधा की जानकारी देते हुए बतायाः

“इस सुविधा का इस्तेमाल शुक्रवार को सुबह 9 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक 95 लोगों ने किया। यदि सबकुछ ठीक रहा तो शनिवार को भी यह व्यवस्था जारी रहेगी। पहले चरण में इसे शहर सभी रायतु बाजारों में लागू करेंगे और दूसरे चरण में इसे अन्य जगहों पर भी लागू किया जाएगा।”

तेलुगु भाषा में रायतु का मतलब किसान होता है। तेलंगाना में रायतु बाज़ार की शुरुआत काफ़ी समय पहले की गई थी, जिसका मकसद था कि मध्यस्थों को हटा कर किसान को अपना माल सीधा ग्राहकों को बेचने की अनुमति देना। जिस तरह से इस बाज़ार को डिजिटल बना दिया गया है, वह ज़रूर इस नोटबंदी के असर को कम करेगा।

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