कैशलेस इकोनॉमी से आसान होगा वित्तीय प्रबंधन, जानिए 11 अन्य फायदे

नोटबंदी से संबंधित तमाम अफरातफरी, अटकलों और अफवाहों के बीच जो एक नयी चीज़ सुनने को मिल रही है, वह है कैशलेस अर्थव्यवस्था। मतलब, सारा लेनदेन इंटरनेट के ज़रिए हो, ताकि नगदी का इस्तेमाल कम हो जाए। नोटबंदी की इस घटना ने हम सबको अर्थव्यवस्था के तमाम पहलुओं के बारे में जानने का अवसर भी दिया है। मौजूदा परिस्थिति में कैशलेस अर्थव्यवस्था को विकल्प के तौर पर भी देखा जा रहा है।

वहीं, रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को दावा किया था कि गोवा देश की सबसे पहली कैशलेस सोसायटी बनने की तरफ अग्रसर है। अब पूरा भारत इस कैशलेस अर्थव्यवस्था के लिए कितना तैयार है, यह आनेवाले वक़्त में पता चल सकेगा। अमेरिका के इंटरनल रेवेन्यू सर्विस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 2008 से 2010 के बीच हर साल औसतन 458 अरब डॉलर की टैक्स चोरी हुई। यह आंकड़ा इस संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत में नोटबंदी के बाद से ऐसा प्रचार किया जा रहा है, जैसे भ्रष्टाचार, आतंकवाद और अर्थव्यवस्था के तमाम रोगों का इलाज कैशलेश अर्थव्यस्था ही हो।

कैशलेस अर्थव्यवस्था अलग तरह की व्यवस्था है, इसलिए अफवाहों पर ध्यान न दें। हम आपको बताते हैं कि इस व्यवस्था से देश और आपको क्या लाभ मिल सकता है।

1. भारत के डिजिटलीकरण में तेज़ी

पूरे भारत को इंटरनेट से जोड़ने का अभियान डिजिटल इंडिया चल रहा है। इसका लक्ष्य है कि 2016 तक ढाई करोड़ लोगों को डिजिटल साक्षर कर दिया जाए। चूंकि कैशलेश अर्थव्यवस्था का पूरा ढांचा इंटरनेट पर निर्भर है, इसलिए इस अर्थव्यस्था से भारत के डिजिटलीकरण में तेज़ी आएगी।

2. बैंकों के पास विकास के लिए अधिक पूंजी

कैशलेश अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि अब बैंकों के पास अधिक पूंजी होगी, जिसे प्राइवेट सेक्टर में निवेश किया जा सकेगा। इसे विकासमूलक कार्यों, परियोजनाओं में लगाया जा सकता है।

3. आधुनिक बैंकिंग और टैक्स व्यवस्था

कैशलेस अर्थव्यवस्था में बैंकिंग और टैक्स व्यवस्था का आधुनिकरण हो जाता है। इस वजह से बैंकों की कार्य-प्रक्रिया में सुधार होता है, साथ ही टैक्स प्रक्रिया भी बेहतर होती है।  वित्तीय लेनदेन पर नजर रखना आसान होगा।

4. लूटमार, चोरी और बैंक डकैती जैसे अपराधों से निजात

कैशलेश यानी जब नोट का चलन समाप्त हो जाएगा या न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाएगा, तो लूटमार, चोरी और बैंक डकैती जैसे आपराधों में कमी आएगी। एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के बाद नवंबर माह में डकैती, चोरी, जबरन वसूली और वाहन चोरी जैसी आपराधिक घटनाओं में कमी आई है।

5. पर्यावरण संरक्षण को ताक़त

जैसा की आप जानते हैं कि नोटों के मुद्रण के लिए भारी मात्रा में पेड़ों की कटाई होती है। कैशलेस अर्थव्यवस्था से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचेगा।

6. बिचौलियों का ख़ात्मा

भ्रष्टाचार के ढांचे में जिसे सबसे बड़े हथियार की तरह देखा जाता है, वह होते हैं बिचौलिया या दलाल। चूंकि, कैशलेस अर्थव्यवस्था लेन-देन की डिजीटल और सीधी प्रक्रिया है, इसलिए बिचौलियों पर अंकुश लगेगा।

7. घर बैठे वित्तीय प्रबंधन

कैशलेस अर्थव्यवस्था का यह भी फ़ायदा है कि आप अपने सारे वित्तीय प्रबंधन जैसे खरीदारी, बिल के भुगतान, टिकट बुकिंग आदि घर बैठे या ऑफिस से कर पाने में सक्षम होंगे।

8. ई-कॉमर्स को बढ़ावा

कैशलेस अर्थव्यवस्था में सबसे अधिक फ़ायदा ई-कॉमर्स  को पहुंचेगा। अर्थव्यवस्था का यह ढांचा इंटरनेट पर निर्भर है, यही वजह है कि ई-सेक्टर में भारी बढ़ोतरी होगी।

9. डिजिटल भुगतान परोक्ष रूप से नोटों और उसके परिवहन में आ रहे व्यय को कम करने में भी सहायक होगा।

10. लेनदेन की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आएगी। कैशलेस अर्थव्यवस्था में सरकार को टैक्स वसूलने में सहूलियत होगी।

11. नकली या जाली नोटों का होगा ख़ात्मा।

अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा नुकसान जाली नोट की छपाई से होता है, लेकिन कैशलेश अर्थव्यवस्था में नोटों न्यूनतम स्तर पर पहुचने के कारण इससे निजात पाया जा स्कता है। जिस वजह से आतंकवाद और अन्य अपराध ही फीडिंग में कमी आती है।

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