हिन्दू ग्रन्थ ‘भविष्य पुराण’ में हैं जीसस और इस्लाम के उदय की भविष्यवाणियां

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5:56 pm 5 Jul, 2016


भारतीय संस्कृति में ज्ञान के परम स्तोत्र वेद हैं। वेद अनादि और अपौरुषेय हैं, जिन्हें जगतपिता ब्रह्मा द्वारा रचा गया था। किन्तु वेद की भाषा और मर्म को ‘पुराणों’ के बगैर समझ पाना नामुमकिन है।

ये पुराण भारतीय ज्ञान-विज्ञान,परंपरा और महानतम संस्कृति के सबसे महत्वपूर्ण स्तोत्र हैं। महर्षि वेदव्यास ने जनमानस के कल्याणार्थ हेतु ब्रह्मा द्वारा मौलिक रूप से रचित, पुराणों का पुनर्लेखन और सम्पादन किया और इसके श्लोकों की संख्या सौ करोड़ से घटाकर चार लाख तक सीमित कर दिया।

महर्षि वेदव्यास जी द्वारा रचित 18 पुराणों में से एक ‘पुराण’ है, भविष्य पुराण। यह पुराण अन्य सभी पुराणों से सर्वथा भिन्न है। भविष्य पुराण में ढेर सारी ऐसी बातें और भविष्यवाणियां हैं, जो चमत्कारिक रूप से सटीक बैठती हैं। साथ ही यह पुराणों की हमारी सामान्य व्याख्या पर सवाल भी खड़े करता है।

वैदिक काल की संस्कृति और सामजिक व्यवस्था का है वर्णन

भविष्य पुराण के माध्यम पर्व में भारतीय संस्कार, तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था, शिक्षा प्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। वस्तुतः भविष्य पुराण सौर प्रधान ग्रन्थ है। सूर्योपासना एवं उसके महत्व का जैसा वर्णन भविष्य पुराण में आता है, वैसा कहीं नहीं है।

पंच देवों में परिगणित सूर्य की महिमा, उनके स्वरूप, परिवार, उपासना पद्धति आदि का बहुत विचित्र वर्णन है। इस पावन पुराण में श्रवण करने योग्य बहुत ही अद्भूत कथाएं, वेदों एवं पुराणों की उत्पत्ति, काल-गणना, युगों का विभाजन, सोलह-संस्कार, गायत्री जाप का महत्व, गुरूमहिमा, यज्ञ कुण्डों का वर्णन, मंदिर निर्माण आदि विषयों का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है।

भारत के उत्थान और पतन की भविष्यवाणी

सहस्त्रों वर्ष पूर्व रए गए इस पुराण के प्रतिसर्ग पर्व में ईसा के 2000 वर्षों की अचूक भविष्यवाणियां हैं। इसकी विषय सामग्री देखकर मन बेहद आश्चर्य से भर उठता है। भविष्य के गर्भ में दबे घटनाक्रम और राजाओं, सन्तों, महात्माओं और मनीषियों के बारे में इतना सटीक वर्णन अचम्भित कर देता है।

इसमें नन्द वंश एवं मौर्य वंश के साथ-साथ शंकराचार्य, तैमूर, बाबर, हुमायूं, अकबर, औरंगजेब, पृथ्वीराज चौहान तथा छत्रपति शिवाजी के बारे में बताया गया है। वर्ष 1857 में इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के भारत की साम्राज्ञी बनने और अंग्रेजी भाषा के प्रसार से भारतीय भाषा संस्कृत के विलुप्त होने की भविष्यवाणी भी इस ग्रन्थ में की गई है।

महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित इस पुराण को इसीलिए भविष्य का दर्पण भी कहा गया है। हजारों वर्ष पूर्व रचे गए भविष्य पुराण के प्रतिसर्ग पर्व के इस श्लोक पर ध्यान दीजिएगा, अवश्य ही आप इसकी सटीकता पर मुग्ध हो जाएंगेः

“रविवारे च सण्डे च फाल्गुनी चैव फरवरी। षष्टीश्च सिस्कटी ज्ञेया तदुदाहार वृद्धिश्म् ।।”

अर्थात भविष्य में अर्थात आंग्ल युग में जब देववाणी संस्कृत भाषा लोपित हो जाएगी, तब रविवार को ‘सण्डे’, फाल्गुन महीने को ‘फरवरी’ और षष्टी को सिक्स कहा जाएगा।

जीसस और इस्लाम के उदय की भविष्यवाणी

भविष्य पुराण में द्वापर और कलियुग के राजाओं तथा उनकी भाषाओं के साथ-साथ विक्रम बेताल तथा बेताल पच्चीसी की कथाओं का विवरण भी है। भारतीय जनसाधारण में खासी प्रचलित सत्य नारायण की कथा भी इसी पुराण से ली गयी है। अन्य पुराणों की तरह इस पुराण में भी ‘कथात्मक’ अंदाज में स्तोत्रों और कई विशिष्ट विधाओं के बारे में वर्णन हैं।


परंतु इसकी सबसे ख़ास विशिष्टता यह है की इसमें आधुनिक युग के इस्लाम और ईसाई सम्प्रदायों के बारे में काफी प्रमुखता से लिखा गया है।

ईसा मसीह का जन्म, उनकी भारत-यात्रा, पैगम्बर मुहम्मद के अरब में आविर्भाव का अचूक वर्णन किया गया है। जीसस की हिमालय यात्रा उनकी तत्कालीन सम्राट शालिवाहन से भेंट के बारे में काफी महत्त्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं, जिसे आधुनिक रिसर्च के बाद प्रमाणित भी किया जा चुका है। इसी तरह इस्लाम के उदय और इस्लाम धर्म के लक्षणों के बारे में भी पुराण काफी विस्तृत व्याख्या करता है।

‘कोडेड’ भाषा शैली में है लिखित

भविष्य पुराण में महर्षि वेदव्यास ने पैगम्बर मोहम्मद को ‘महामद’ कहा है। इसी तरह कुछ विशेष शब्दावलियों का भी प्रयोग किया गया है जैसे ‘राजा भोज’, कालिदास इत्यादि जो किसी व्यक्ति विशेष का नाम न होकर एक विशिष्ट पद या उपाधि को ‘संबोधित’ करते हैं।

भविष्य पुराण के अध्ययन के दौरान इन शब्दावलियों के निहितार्थ को आसानी से पहचाना जा सकता है, क्योंकि उसमें लिखी हुई घटनाएं बीत चुकी हैं। दुर्भाग्य से अन्य पुराणों में वर्णित ज्यादातर घटनाक्रम कलिकाल के पूर्व के हैं, जिसके बारे में अन्य स्तोत्रों से स्पष्टतया किसी को पूर्ण प्रमाणित जानकारी उपलब्ध नहीं है।

दशकों से हम पुराणों के प्रसंगों और घटनाओं को सिर्फ एक ‘मिथक’ के रूप में मानते आए हैं, लेकिन भविष्य पुराण के अध्ययन से ये धारणा स्पष्ट हो जाती हैं की पुराणों की भाषा एक विशिष्ट कोड में ‘कूटबद्ध’ है। जिसे डिकोड किए जाने की आवश्यकता है।

पुराण के आधे भाग से है दुनिया अनभिज्ञ

भारतीय प्राच्य विद्या के विद्वानों के अनुसार भविष्य पुराण में मूलतः पचास हजार श्लोक विद्यमान थे, परन्तु श्रव्य परम्परा पर निर्भरता और अभिलेखों के लगातार विनष्टीकरण के परिणामस्वरूप वर्तमान में केवल 129 अध्याय और अठ्ठाइस हजार श्लोक ही उपलब्ध रह गए हैं।

स्पष्ट है कि अभी भी दुनिया उन अद्‍भुत एवं विलक्षण घटनाओं और ज्ञान से पूर्णतया अनभिज्ञ हैं, जो इस पुराण के विलुप्त आधे भाग में वर्णित रही होंगी।

परन्तु हजारों-हजार साल पूर्व लिखित इस पुराण की भविष्यवाणियों से पता चलता है की व्यास जी की दृष्टि वाकई इतनी दिव्य थी कि उन्होंने भविष्य में घटित होने वाली सभी गतिविधियों को उन्होंनें पहले ही इस पुराण में लिपि बद्ध कर लिया।

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