मिलिए 91 साल की डॉक्टर से जो मरीज़ों से नहीं लेती फीस, इलाज करती हैं प्यार से

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9:30 pm 26 May, 2016


चेहरे पर झुरियां, कांपते हाथ, चलने-फिरने में दिक्कत, लेकिन गजब का हौसला। वह मानवता का पाठ आज़ादी के वक़्त से पढ़ा रही हैं। उन्हें हर कोई सलाम किए बिना नहीं रहता। यह कहानी है, एक ऐसी महिला कि जो अपनी ज़िंदगी के 91 बसंत देख चुकी हैं, इसके बावजूद समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून उनमें है।

डॉ. भक्ति यादव 91 साल की हैं, लेकिन वह आज भी समय पर अपने क्लिनिक इसलिए पहुंचती हैं, ताकि अपने मरीजों का उचित इलाज़ कर सकें। समय की पाबंद डॉ. भक्ति का स्वाभाव बहुत ही सरल और मीठा है।

“कोई मेरी उम्र पूछता है तो तो मैं साफ बोल देती हूँ कि ‘कोई मेरी उमर और पगार मत पूछना’ मेरा स्वाभाव मेरे मरीज़ों के प्रति बहुत ही मज़ाकिया रहता है।”

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर भक्ति यादव इंदौर की पहली महिला एमबीबीएस डॉक्टर हैं। 1948 से भक्ति मरीज़ों का निःशुल्क इलाज़ कर रही हैं। उनकी ख्याति इस प्रकार है कि पूरे मध्यप्रदेश और आस-पास के राज्य से उनके पास मरीज़ों का तांता लगा रहता है। वह आज तक हज़ारों महिलाओं की डिलीवरी कर चुकी हैं।

डॉ. भक्ति की सबसे ख़ास बात यह है कि उनका प्रयास रहता है कि वह प्रसूति की नॉर्मल डिलीवरी करें। 68 साल के करियर में उन्होने हज़ारों नॉर्मल डिलीवरी करवाई है, जिस वजह से उनकी अलग पहचान है। हालांकि अधिक उम्र होने के कारण अब डॉ. भक्ति मरीज़ों को उतना समय नही दे पातीं, लेकिन उनकी सलाह कम कीमती नही है।

“मैं भले ही अब उतने मरीज़ नही देख पाती हूं, लेकिन मौखिक सलाह हमेशा देती हूं। मैं उसे ऐसे लौटने नही देती, क्योंकि मुझे पता है उस एक सलाह की वजह से उस मरीज़ का फायदा हो सकता है।”


डॉ. भक्ति का इलाज़ करने का तरीका सबसे अलग है। उनका मानना है कि डॉक्टर के अनुभव के साथ उनके प्यार की भी ज़रूरत पड़ती है। इस वजह से आज के दौर के डॉक्टर से उन्हे शिकायत भी रहती है। डॉ. भक्ति कहती हैंः

“आज के डॉक्टर हर मुमकिन सेवा तो करते हैं, लेकिन एक बात जो मुझे चुभती है, वह ये है कि वे मरीज़ो से संपर्क नहीं रखते। बहुत कम लोगों को मैने देखा है, जो मरीज़ों को दिल में रखते हैं।”

हम कह सकते हैं कि डॉ. भक्ति मरीज़ों के लिए सिर्फ़ डॉक्टर नही हैं, बल्कि एक वरदान हैं।

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