शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के बारे में 15 तथ्य़ जो आप शायद नहीं जानते होंगे

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12:32 pm 23 Mar, 2016


शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले… वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशाँ होगा.. । भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 23 मार्च का विशेष स्थान है। वर्ष 1931 में इसी दिन महान क्रान्तिकारी भगत सिंह अपने दो साथियों राजगुरु और सुखदेव के साथ अंग्रेजों द्वारा फांसी पर चढ़ा दिए गए थे।

28 सितम्बर 1907 को भगत सिंह का जन्म एक सिख परिवार में हुआ था। बाद में भगत सिंह भारतीय क्रान्तिकारियों के लिए रोल मॉडल साबित हुए। हम यहां शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के बारे में उन 18 तथ्यों का जिक्र करने जा रहे हैं, जिनके बारे में आपको संभवतः नहीं पता होगा।

1. 8 वर्ष की उम्र में भगत सिंह बंदूकों की खेती करना चाहते थे।

अपने आयु वर्ग के दूसरे बच्चों की तरह ही भगत सिंह भी खेलना पसंद करते थे, लेकिन वह खेल-खेल में अंग्रेजों को भगाना चाहते थे। अपने पिता के साथ खेतों में जाने के दौरान, भगत सिंह अक्सर उनसे पूछा करते थे कि वह अपने खेतों में बंदूक क्यों नहीं उपजा सकते, ताकि अंग्रेजों को मारकर भगाया जा सके।

2. जलियांवाला बाग में निर्मम गोलीकांड की घटना ने भगत सिंह को हमेशा के लिए क्रान्तिकारी बना दिया।

उस समय वह सिर्फ 12 साल के थे। 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में हुए गोलीकांड में एक हजार से अधिक लोगों ने अपनी जानें गंवाई थी और हजारों की संख्या में लोग घायल हो गए थे। भगत सिंह के बाल-मन पर इस घटना का गहरा प्रभाव पड़ा। घटना के अगले दिन भगत सिंह स्कूल नहीं गए, लेकिन जलियांवाला बाग गए। वहां उन्होंने बाग की मिट्टी उठाकर कसम खाई कि वह अंग्रेजों के अत्याचार से भारत को आजाद करके रहेंगे।

3. अपने कॉलेज के दिनों में भगत सिंह ने नेशनलिस्ट यूथ ऑर्गेनाइजेशन (नौजवान भारत सभा) की स्थापना की।

वह लाहौर में उसी नेशनल कॉलेज के छात्र थे, जिसकी स्थापना लाला लाजपत राय ने इस उद्देश्य के साथ की थी कि इससे भारत की आजादी में मदद मिल सकेगी।

4. भगत सिंह एक मंजे हुए थियेटर कलाकार भी थे।

वह अपने मित्रों में बेहद लोकप्रिय भी थे। उन्होंने राणा प्रताप, सम्राट चन्द्रगुप्त तथा भारत दुर्दशा जैसे नाटकों में अभिनय किया था और लोगों में राष्ट्रवादी विचार का प्रचार किया।

5. वह एक सशक्त क्रान्तिकारी लेखक भी थे।

वह उर्दू और पंजाबी भाषाओं में अखबारों में नियमित तौर पर लिखते थे। यहां तक कि जेल में बंद रहने के दौरान भी उन्होंने नियमित तौर पर लिखा था।

6. भगत सिंह कई भाषाओं के जानकार थे। गुरुमुखी के अलावा उन्हें अंग्रेजी, हिन्दी, उर्दू और पंजाबी भाषाओं पर अधिकार प्राप्त था।

7. हिन्दू-मुस्लिम दंगों से दुःखी होकर भगत सिंह ने घोषणा की थी कि वह नास्तिक हैं।

यहां तक कि उन्होंने खुद को सिख धर्म से भी अलग कर लिया था। लाहौर सेन्ट्रल जेल में रहने के दौरान उन्होंने एक लेख लिखा था, “मैं नास्तिक क्यों हूं”। इस लेख में उन्होंने इस बात का जिक्र किया है। इसमें उन्होंने लिखा था जिंदगी तो अपने दम पर ही जी जाती है। दूसरों के कंधों पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।

8. महात्मा गांधी की अहिंसा की नीतियों से भगत सिंह सहमत नहीं थे।

चौरी चौरा में हिंसा की घटना के बाद जब महात्मा गांधी ने असहयोग आन्दोलन खत्म करने की घोषणा की, तब क्रान्तिकारियों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी थी। ऐसे समय में भगत सिंह को लगता था कि बिना हथियार उठाए आजादी नहीं मिल सकती है।


9. देश के प्रति समर्पित होने के लिए भगत सिंह ने विवाह नहीं किया।

जब उनके परिजन उनका विवाह कराने की कोशिशों में लगे थे, तब वह घर से भाग निकले। बाद में उन्होंने एक पत्र में इस बात का जिक्र किया था कि उनका समर्पण देश के प्रति है।

10. भगत सिंह ने अपना वेश वदलने के लिए अपने बाल कटवा लिए और दाढ़ी भी साफ करवा ली।

नास्तिक होने के बावजूद भगत सिंह की अपने धर्म में आस्था थी, लेकिन अंग्रेजों से बचने के लिए उनका बाल कटवाना जरूरी था। वेश बदल कर वह लाहौर से भागकर कोलकाता आ गए। भगत सिंह की यह तस्वीर उन्हीं दिनों की है।

11. भगत सिंह ने नारा दिया था, इन्क्लाब जिन्दाबाद।

निडर भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर दिल्ली में सेन्ट्रल असेम्बली हॉल में बम फेंका। वह वहां से भागे नहीं, बल्कि इन्क्लाब जिन्दाबाद बोलते हुए गिरफ्तारी दी। इस घटना का मकसद किसी को चोट पहुंचाना नहीं था, बल्कि ब्रिटिश साम्राज्यवादियों को डराना था।

12. भगत सिंह की अंतिम इच्छा थी कि उन्हें गोली मार कर मौत दी जाए। हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने उनकी इस इच्छा को नज़रअंदाज़ कर दिया।

13. भगत सिंह का अंतिम संस्कार सतलज नदी के किनारे बेहद गुप्त तरीके से किया गया।

ब्रिटिश अधिकारियों ने भगत सिंह को फांसी देते हुए सभी नियम-कानूनों को ताक पर रख दिया था।

14. फांसी पर चढ़ते समय भगत सिंह की आयु सिर्फ 23 साल थी।

उन्होंने हंसते हुए फांसी का फंदा चूमा था।

15. भगत सिंह के शहीद होने के बाद देश में जैसे राष्ट्रवाद की एक नई लहर चल पड़ी।

सैकड़ों युवा ब्रिटिश सरकार के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हुए।

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