बेटियों ने भरी ‘उड़ान’; अपने सपनों को एक दिन के लिए जी कर देखा

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7:48 pm 14 Feb, 2016

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बहुप्रचारित ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत 400 से अधिक बेटियों ने ऊंची उड़ान भरी। जी हां, पंजाब के पिछड़े मानसा जिले में 6ठी से 8वीं कक्षा में पढ़ने वाली इन बेटियों ने एक दिन के लिए IAS, IPS और डॉक्टर की भूमिका निभाई।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मनसा जिला प्रशासन के तत्वावधान में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत शुरू की गई पहल उड़ान – एक दिन के लिए अपने सपने को जी लो को जबर्दस्त सफलता मिली हैै।

यहां तक कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी अपनी वेबसाइट पर इस पहल का स्वागत किया है और प्रशंसा की है।

इस पहल का नेतृत्व करने वाली मानसा जिला की अपर डिप्टी कलेक्टर ईशा कालिया कहती हैंः

 “मानसा जैसे पिछड़े जिले मे कई माता-पिता अपनी बेटियों के शिक्षा का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं हैं। कुछ मामलों में लड़कियां भी वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालयों में प्रवेश करने के विचार से घबराई हुई थीं। उनमें से कुछ तो पुलिस के नाम से इतनी डरी हुई थी कि उनके माता-पिता से यह कहा गया कि अगर वह पुलिस स्टेशन में असहज महसूस करेंगी, तो उन्हें बता दिया जाएगा और इस मामले में वे आकर अपने बेटी को वापस ले जा सकते हैं।”

इस पहल के बहाने कई लड़कियों के मन से पुलिस और नौकरशाहों के डर को दूर किया गया।

इस योजना के तहत लड़कियों को जागरूक करने के उद्देश्य से उनके रुझान के मुताबिक एक दिन के लिए उन्हें पुलिस अधिकारी, आईएएस अधिकारी या डॉक्टर बनाया गया था।

इस पहल को जबर्दस्त सफलता मिली। पिछड़ा जिला होने के बावजूद मानसा जिले में पहले ही दिन 70 से अधिक बेटियों ने अपने कैरियर को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों के साथ पूरा दिन बिताया। जहां उन्हें पेशेवर वातावरण के बारे में जानने का मौका तो मिला ही, साथ ही भविष्य मे करियर को लेकर बेहतर निर्णय लेने के विकल्प के बारे में जानने की भी मदद मिली।


इस रिपोर्ट के मुताबिक, यह योजना जालंधर, मानसा, फरीदकोट, बठिंडा, लुधियाना, मोगा, रोपड़, होशियारपुर, कपूरथला और नवांशहर के जिलों में शुरू की गई है। पंजाब में यह योजना पंजाब शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित ‘उड़ान’ नामक पहल के जरिए शुरू की गई है।

‘उड़ान’ की टैग लाइन है ‘उड़ान – एक दिन के लिए अपने सपने को जी लो।’

मानसा जिला में लिंग अनुपात में बेहद असमानता है। यहां प्रति 1000 पुरुषों पर 883 महिलाएं हैं।

अगर शिक्षा की बात करें तो पंजाब में जहां औसतन साक्षरता दर 71 फीसदी है, वही मानसा में यह दर सिर्फ़ 55 प्रतिशत है। इसके अलावा मानसा में स्कूल छोड़ने वालों की दर 30 फीसदी है।

पंजाब सरकार ने संबंधित जिला स्तर की इकाइयों से कहा है कि परियोजना के कार्यान्वयन के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करे।

विस्तृत कार्य योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों में ऐसे इलाक़ों को इस परियोजना के लिए चुना जाएगा, जहां बाल लिंग अनुपात बहुत ही कम है।

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