“बांग्लादेश में 30 साल बाद नहीं बचेगा एक भी हिन्दू”

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5:52 pm 23 Nov, 2016


बांग्लादेश में करीब 30 साल बाद एक भी हिन्दू नहीं बचेगा। ढाका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अब्दुल बरकत के अनुसार प्रतिदिन के हिसाब से औसतन 632 हिन्दू बांग्लादेश छोड़ रहे हैं और अगर यह पैटर्न जारी रहा तो जल्दी ही बांग्लादेश में हिन्दू नहीं बचेंगे।

डॉ. अब्दुल बरकत की पुस्तक पॉलिटीकल इकोनॉमी ऑफ रिफॉर्मिंग एग्रीकल्चर-लैन्ड-वाटर बॉडीज इन बांग्लादेश में यह बात कही गई है। इस पुस्तक का प्रकाशन 19 नवंबर को हुआ है।

ढाका विश्वविद्यालय में इस पुस्तक के विमोचन के दौरान प्रोफेसर बरकत ने दावा किया कि 1964 से 2013 के बीच करीब 1 करोड़ 13 लाख हिन्दुओं ने धार्मिक भेदभाव और उत्पीड़न की वजह से बांग्लादेश दिया। यह आंकड़ा औसतन हर दिन 632 का बैठता है। इसका अर्थ ये भी है कि हर साल 2,30,612 हिन्दू बांग्लादेश छोड़ रहे हैं।

इस पुस्तक में 30 साल के अध्ययन और आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रोफेसर बरकत ने लिखा है कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दिनों में हर दिन हिन्दुओं के पलायन का आंकड़ा 705 था। 1971-1981 के बीच ये आंकड़ा 512 रहा। वहीं 1981-1991 के बीच औसतन 438 हिंदुओं ने हर दिन पलायन किया। 1991-2001 के बीच ये आंकड़ा बढ़कर 767 हो गया। वहीं, 2001-2012 में हिंदुओं के हर दिन पलायन का आंकड़ा 774 रहा।

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इसी कार्यक्रम में ढाका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अजय रॉय ने हिन्दुओं के बांग्लादेश से पलायन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश बनने से पहले पाकिस्तान के शासन वाले दिनों में सरकार ने अनामी प्रॉपर्टी का नाम देकर हिंदुओं की संपत्ति को जब्त कर लिया। स्वतंत्रता मिलने के बाद भी निहित संपत्ति के तौर पर सरकार ने कब्जा जमाए रखा। यही वजह है कि करीब 60 फीसदी हिंदू भूमिहीन हो गए।

इस अवसर पर मौजूद रिटायर्ड जस्टिस काजी इबादुल हक ने कहा कि अल्पसंख्यकों और गरीबों को उनके जमीन के अधिकार से वंचित कर दिया गया।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में बांग्लादेश में हिन्दुओं को विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

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