अब भारत की राह पर चलेगा ऑस्ट्रेलिया, बड़े नोटों से किनारा करने की कवायद!

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12:19 pm 14 Nov, 2016


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश में 500 और 1000 रुपए के नोटों को बंद किए जाने के फैसले का दुनियाभर में स्वागत हो रहा है।

दुनिया के करीब 50 देशों में वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाली संस्था यूबीएस का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया को इस मामले में भारत के नक्शे-कदम पर चलना चाहिए।

यूबीएस के अनेलिस्ट जोनाथन मट्ट ने सोमवार को कहा कि बड़े नोट्स बंद किए जाने से न केवल ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा, बल्कि बैंकों के लिए भी ठीक रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम अपराध और वेलफेयर फ्रॉड को कम करने में सहायक होगा। इस कदम से टैक्स रेवेन्यू और बैंक डिपॉजिट्स में बढ़त देखने को मिलेगी।


ब्लैकमनी के खिलाफ अभियान चलाते हुए पिछले सप्ताह भारत सरकार ने 500 और 1000 रुपए के नोट्स बंद कर दिए।

हालांकि, ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था भारत जितनी बड़ी नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि यहां भी लोगों ने काली कमाई को दबा रखा है। ऑस्ट्रेलिया में 100 डॉलर के करीब 30 करोड़ करेन्सी नोट्स सर्कुलेशन में हैं, लेकिन इन बड़े नोट्स को सामान्य जनता कभी-कभार ही देख पाती है। इससे अंदाजा लगाया जाता है कि लोगों ने इन बड़े नोटों को ब्लैक मनी के रूप में छुपा रखा है।

जोनाथन मट्ट का कहना है कि इन नोटों की वापसी से बैंकों में डिपॉजिट्स करीब 4 फीसदी तक बढ़ जाएंगे।

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