ज्योतिष की नींव पर खड़ी हुई स्थिर गणतंत्र की इमारत

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2:36 pm 26 Jan, 2016

भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को जब लागू किया गया था, तब गुलामी से आजाद हुए समकालीन देशों की आर्थिक, राजनीतिक उठापठक और भारत के वैविध्य को देखकर स्थाई गणतंत्र की उम्मीद सिर्फ ‘उम्मीद’ ही थी। आज दुनिया के सबसे बड़े ‘गणतंत्र’ के रूप में लब्धप्रतिष्ठ भारत पर हर भारतीय को गर्व है।

आखिर कैसे 18 भाषाओं, 6 हजार से अधिक बोलियों और 10 से ज्यादा धर्मों के बीच बसने वाला भारत विभाजन की त्रासदी के बाद अपनी अखंडता सुनिश्चित करने में कामयाब रहा। इस प्रश्न के कई तरह के जवाब दिए जा सकते हैं, लेकिन हम आपको इसका वह कारण बताएंगे, जिसके बारे में शायद ही आपको पता हो।

शुभ मुहूर्त में मिली थी भारत को स्वतंत्रता

तत्कालीन वायसराय लार्ड माउंटबेटन ने दोनों देशों भारत और पाकिस्तान को 14-15 अगस्त में से किसी दिन अपनी-अपनी आजादी के कार्यक्रम निर्धारित करने को कहा, क्योंकि इसके अलावा उन्हें कई अन्य राष्ट्रों के कार्यक्रमों में आतिथ्य के लिए निमंत्रण मिला हुआ था। ग्रहीय विन्यास कुछ और ही कहानी कह रहे थे।

ज्योतिष पर अगाध श्रद्दा रखने वाले राजेन्द्र प्रसाद और वल्लभभाई पटेल ने देश की अखंड संप्रभुता और भविष्य के लिए पं सूर्यनारायण व्यास से आजादी के लिए उपयुक्त मुहूर्त चुनने के लिए निवेदन किया। महाकाल की नगरी उज्जैन के प्रसिद्द ज्योतिषाचार्य, साहित्य मनीषी, पत्रकार और प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी पद्मभूषण पं सूर्यनारायण व्यास जी ने आजादी के लिए 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्री बारह बजे का मुहूर्त निर्धारित किया।

रात बारह बजे का समय ही क्यों चुना गया!

आपके मन में यह प्रश्न जरूर होगा की बारह बजे रात के मुहूर्त को स्वंतत्रता की घोषणा के लिए क्यों चुना गया! यदि ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों की मानें तो 14-15 अगस्त के गोचर में पञ्चग्रही युतियां देश और समाज के लिए काफी भारी थीं। ऐसे ग्रहीय विन्यास में बड़े-बड़े युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं के संकेत मिल रहे थे। इसी बीच पाकिस्तान ने 14 अगस्त की शाम को तकरीबन 4 बजे अपनी स्वतंत्रता की औपचारिक घोषणा कर दी। पंडित जी ने रात 12:01 के समय को स्वतंत्रता की घोषणा के लिए चिन्हित किया, क्योंकि उस वक्त स्थिर लग्न ‘वृषभ’ चल रहा था, जो किसी भी कार्य की शुरुआत और उसके स्थायीत्व के लिए सबसे शुभ लग्न माना जाता है।

इसके अलावा उसी समय रात 12:15 के पूर्व सर्वश्रेष्ठ अभिजित मुहूर्त भी चल रहा था, जो मुहूर्त शास्त्रों के मुताबिक़ उस दिन का सबसे बेहतरीन समय था। यही कारण था की चार विशाल युद्धों और अनगिनत विद्रोही ताकतों के बावजूद भारत की अखंडता पर कोई आंच नहीं आयी।

आधुनिक आर्यभट्ट के रूप में विख्यात थे पंडित व्यास


आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की पंडित जी के कहने पर संसद भवन को देर रात धोकर शुद्धिकरण भी करवाया गया था। पंडित सूर्यनारायण व्यास जी के पुत्र श्री राजशेखर व्यास की पुस्तक ‘याद आते हैं’ के अनुसार एक दफा पंडित जी से चीन-भारत युद्ध के समय पूछा गया था कि क्या हिन्दुस्तान फिर से गुलाम हो जाएगा ! तब पंडित जी ने कहा था की भारत की आजादी को कुछ नहीं होगा लेकिन भारत की शान जरूर खतरे में पड़ जायेगी। पंडित सूर्यनारायण व्यास जी ने एक पत्रिका ‘आज’ में 1930 में ही घोषणा कर दी थी की 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हो जाएगा।

सरदार पटेल की मृत्यु, शेख-अब्दुल्ला के पतन और भारत में आने वाले सभी भूकंपों की भविष्यवाणी से लेकर असंख्य भविष्यवाणियों के कारण पंडित व्यास को आधुनिक आर्यभट्ट भी कहा जाता है।

गांधीजी को दी थी ‘विभाजन’ की चेतावनी

भविष्यदृष्टा व्यास जी ने 1942 में गांधीजी को जिन्ना से न मिलने की सलाह दी थी। ज्योतिष होने के साथ-साथ प्रखर राष्ट्रवादी होने के कारण पंडित जी ने गांधी जी को उस सभा में जाने से पूर्व भी इसे टालने की सलाह दी थी। जिसे गांधीजी ने गंभीरता से नहीं लिया। संयोग से उसी सभा में जिन्ना ने नए पाकिस्तान की मांग रख दी। परिणाम आज पाकिस्तान और आतंकवाद के रूप में हमारे सामने है।

ठीक इसी तरह शास्त्री जी के ताशकंद जाने से पूर्व भी श्री व्यास जी ने ग्रहों की चाल के आधार पर एक अखबार में लिखा था की वे शायद लौट कर न आएं। इस चेतावनी को शास्त्री जी ने भी मजाक में ले लिया था। यदि ज्योतिषीय सलाहों के मद्देनजर ऐसे कई बड़े फैसले लिए जाते, तो शायद विभाजन सहित कई बड़ी त्रासदियों को टाला जा सकता था।

2020 तक भारत के सिरमौर बनने की भविष्यवाणी

गुलामी की जंजीरों से आजाद हुए भारतवर्ष की पहली कुंडली बनाने वाले पंडित सूर्यनारायण व्यास ने भारत के भविष्य का खाका वर्ष 1947 में रच दिया था। भारतवर्ष की कुण्डली वृषभ लग्न, कर्क राशि और पुष्य नक्षत्र की है। स्वतंत्रता के सत्तर सालों में भारत ने शनि, बुध, केतु, शुक्र और सूर्य की दशाओं में विचरण किया है। पंडित सूर्यनारायण व्यास ने बहुत पहले ही 1990 के बाद यानी शुक्र की दशा में भारत की आर्थिक प्रगति की भविष्यवाणी कर दी थी। वर्तमान में भारत चंद्रमा की दशा में विचरण कर रहा है। पंडित जी के मुताबिक़ इसी दशा में भारत 2020 तक दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बन जाएगा। भारत के साथ-साथ पंडित जी ने उसी समय पाकिस्तान के विभाजन की भी भविष्यवाणी कर दी थी। साथ ही 2018 के बाद पाकिस्तान के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगने की भी भविष्यवाणी की है।

महान ज्योतिर्विद व्यास जी का अद्भुत ज्योतिष ज्ञान भारतीय ऋषियों के अद्भुत अनुसंधान पर आधारित था। दुर्भाग्य से समाज के तथाकथित बुद्धिजीवी तबके ने ऋषियों के इस अमूल्य ज्ञान को जमकर अपमानित किया है। यदि अन्य विधाओं की तरह भारतीय ज्योतिष पर भी बड़े पैमाने पर अनुसंधान किए जाएं तो इसके काफी बेहतर परिणाम हमें देखने को मिल सकते हैं।

स्थिर लग्न में जन्में गणतंत्र की गरिमा और अखंडता अक्षुण्ण रहे इसी आशा और विश्वास के साथ हमारी तरफ से आप सब को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

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