यहां पूजा कर शनि को प्रसन्न किया था अर्जुन ने, मिला था ब्रह्मास्त्र

12:24 pm 3 Apr, 2016


महाराष्ट्र के शनि-शिंगणापुर मंदिर के गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश के लिए आंदोलन चल रहा है। वहीं, समाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई के नेतृत्व में एक बार फिर महिलाओं ने शनिवार को यहां जाने की कोशिश की। कोर्ट का आदेश होने के बावजूद उन्हें रोक दिया गया।

इस मामले में एक दिन पहले ही बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसे किसी भी स्थान पर महिलाओं को जाने से नहीं रोका जा सकता है, जहां पुरुष जा सकते हैं।

लेकिन हम आपको शनि-शिंगणापुर नहीं, बल्कि एक ऐसे अन्य शनि मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां महान धर्नुधारी अर्जुन ने शनि की पूजा-अर्चना की थी और उन्हें प्रसन्न किया था। प्रसन्न होकर भगवान शनि ने अर्जुन को ब्रह्मास्त्र की विद्या दी थी।

यह ऐतिहासिक मंदिर, मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित है। इस त्रेता-युगीन मंदिर में शनि-दर्शन के लिए हर साल दुनियाभर से लाखों श्रद्धालु आते हैं।

इस मंदिर का उल्लेख शास्त्रों और पुराणों में भी किया गया है। दंतकथाओं के मुताबिक, इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1808 में सिंधिया राजवंश के राजा दौलतराव सिंधिया ने करवाया था।

मंदिर में सिंधिया राजवंश के आधिपत्य को दर्शाता एक शिलालेख भी लगा हुआ है।


कई इतिहासकारों का मानना है कि यह मंदिर दरअसल छठवीं शताब्दी का है। यहां शनिवार को श्रद्धालुओं की संख्या करीब 20 हजार तक पहुंच जाती है। शनि अमावस्या के दिन तो यहां रिकॉर्डतोड़ भीड़ होती है। इस दिन करीब 7 लाख से अधिक लोग यहां पूजा-अर्चना करते हैं।

बताया गया है कि जिस शनि पर्वत पर यह मंदिर स्थित है, वहां का एक-एक पत्थर शनि का प्रभाव रखता है। यह शनि पर्वत करीब 27 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है।

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