एपीजे अब्दुल कलाम, भारत के ‘मिसाइलमैन’ से जुडी कुछ खास बाते

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5:41 pm 26 Sep, 2015

‘मिसाइलमैन’ के रूप में दुनिया में विख्यात पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनकी बातें आज भी हमारे जेहन में जिन्दा हैं। उनके कथ्यों में से एक ‘‘सपना वह नहीं, जो आप नीन्द में देखते हैं। यह तो एक ऐसी चीज है, जो आपको नीन्द ही नहीं आने देती’’ वर्तमान और भविष्य की उन तमाम पीढिय़ों के लिए प्रेरणादायक है, जो परिश्रम के बल पर अपना भाग्य स्वयं बनाने का सामर्थ्य रखते हैंं।

डॉ. कलाम की कमी को पूरा करना बहुत बड़ी चुनौती है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पहले राष्ट्र रत्न थे, राष्ट्रपति बाद में बने। वह हर वक्त नई खोज में लगे रहते थे। देश उनके अतुल्य योगदान को कभी नहीं भूल सकता। वह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन हमारे लिए प्रेरणास्त्रोत हैं।


भारत को विज्ञान के क्षेत्र में मज़बूत बनाने के लिए उन्होंने विज्ञान से जुड़ी अनेक योजनाओं तथा रणनीतियों को निपुणतापूर्वक पूरा कराने में प्रभावाशाली भूमिका निभाई। इसके तहत डॉ. कलाम ने ‘त्रिशूल’, ‘पृथ्वी’, ‘आकाश’, ‘नाग’, ‘अग्नि’ और ‘ब्रह्मोस’ मिसाइलों के विकास में मुख्य भूमिका अदा की। बैलेस्टिक मिसाइल और लॉन्चिंग प्रौद्योगिकी में भारत को प्रबल बनाने के कारण उनका नाम ‘मिसाइल मैन’ पड़ा। उनकी जीवनी “विंग्स ऑफ फायर” भारतीय युवाओं को मार्गदर्शित करती है। इसी के साथ, उन्होंने अपनी एक और पुस्तक “इंडिया 2020” में भारत को लेकर अपने विचार लोगों के समक्ष रखे।

डॉ. कलाम भारत की सभी संस्कृतियों में विश्वास रखते थे। देश के राष्ट्रपति का कार्यभार भलीभांति निभाने के बाद उन्होंने एक वैज्ञानिक के रूप में, तो कभी एक शिक्षक के रूप में देश सेवा का काम जारी रखा। वह ऐसे राष्ट्रपति थे जो खास होकर भी आम थे और आम होकर भी खास। उनकी विशाल शख्सियत ही थी जिसने उन्हें ‘लोगों का राष्ट्रपति’ बनाया। एक अतुल्य व्यक्तित्व, दिलदार और एक उम्दा शख्स, अपनी खुशगवार यादें पूरी दुनिया को दे गया।

भारत सरकार ने एपीजे अब्दुल कलाम के सम्मान में उनके जन्मदिन 15 अक्टूबर को “विद्यार्थी दिवस” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

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