इस ‘मेड इन इंडिया’ क्रीम पर नहीं है एक रुपए का भी कर्ज, 1947 में आजादी के जश्न में बंटी थी मुफ्त

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6:13 pm 17 Oct, 2016


शायद ही कोई ऐसा हो, जिसे बोरोलीन के बारे नहीं पता होगा। बोरोलीन के 87 वर्ष के इस सफर की शुरुआत वर्ष 1929 में हुई। 1929 में व्यापारी समुदाय के एक समृद्ध सदस्य गौर मोहन दत्ता ने कोलकाता में जीडी फार्मास्युटिकल्स की कंपनी की शुरुआत की। इस कंपनी द्वारा बोरोलीन क्रीम के बाजार में उतारते ही, यह हर घर-घर तक पहुंच गई।

यह वह समय था जब भारत गुलामी की जंजीरों से जकड़ा हुआ था और देश का हर नागरिक अंग्रेजी हुकूमत से देश को स्वंतंत्र कराने के मकसद से अपने पथ पर अग्रणी था। ऐसे में एक स्वदेशी क्रीम का भारतीयों तक पहुंचना इसकी लोकप्रियता का बखान करता है।

जब बोरोलीन को बाजार में उतारा गया, तो ब्रिटिश साम्राज्य इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देख चौंक उठा। तब अंग्रेजों ने इस क्रीम को बंद करने की कई कोशिशें की, लेकिन वह अपने इरादों में कामयाब नहीं रहे, उन्हें मुंह की खानी पड़ी। तब से लेकर अब तक बोरोलीन ने 87 सालों का सफर तय कर लिया है, जो अब तक चला जा रहा है।

जहां आज कई बड़ी-बड़ी औद्योगिक कंपनियां करोड़ों के कर्ज में डूबी हुईं हैं, वहीं आज के इस दौर में भारतीयता पर आधारित बोरोलीन पर सरकार का एक रुपया भी कर्ज नहीं है।

प्राथमिक चिकित्सा किट का एक अभिन्न हिस्सा बोरोलीन आज भी सबसे भरोसेमंद एंटीसेप्टिक क्रीम मानी जाती है।

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जब भारत को 1947 में आजादी मिली, उस वक़्त बोरोलीन की निर्माता कंपनी के मालिक गौर मोहन दत्ता के बेटे देबाशीष दत्ता थे। ऐसा कहा जाता है जब भारत आजाद हुआ तब  इस कंपनी ने लोगों को मुफ्त में एक लाख बोरोलीन बांटी थी।

यही नहीं, क्रीम की लोकप्रियता इतनी थी कि खुद पंडित जवाहर लाल नेहरू, अभिनेता राजकुमार ने इसका इस्तेमाल करना शुरू किया। एक ऐसा समय जिसमें मार्केटिंग या विज्ञापन का दौर प्रचलित नहीं हुआ करता था, ऐसे में एक कंपनी के विशेष प्रोडक्ट की प्रसिद्धि काफी मायने रखती है।

इस तरह से आज बोरोलीन को बनाने वाली कंपनी जीडी फार्मा और बोरोलीन एक दूजे के पर्याय बन गए।

आज भी बिना किसी मार्केटिंग के इस कंपनी ने 2015-16 में 105 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल किया।

बोरोलीन बनाने वाली कंपनी के पास सभी अनिवार्य सरकारी लाइसेंस हैं, साथ ही जो जीएमपी मानकों के अनुरूप है।

भारतीय बाजार में कई स्किनकेयर उत्पादों की भरमार है, इसके बावजूद बोरोलीन ने  सफलतापूर्वक बाजार में अपनी स्थिति को बरकरार रखा है। इस कामयाबी के पीछे इस प्रोडक्ट की कई सालों से वही बेहतरीन गुणवत्ता का पालन है।

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