इन 8 जानवरों का हो रहा है तेजी से विकास, जलवायु परिवर्तन है कारण

12:58 pm 15 Apr, 2016


आप शायद विश्वास न करें पर यह कहा जाता है कि जलवायु परिवर्तन या फिर पर्यावरण में उतार-चढ़ाव की वजह से जानवर जीवित रहने के लिए निरंतर विकास की तरफ बढ़ रहे हैं।

जैसा कि हम सोचते हैं कि जानवरों का विकास सैंकड़ों, हजारों या लाखों सालों में होता है, इसके विपरीत कई जानवर बहुत जल्दी विकसित हो जाते हैं।

नीचे, ऐसे ही आठ जानवरों के बारे में जानकारी दी गई है, जो बहुत जल्द विकसित हो जाते हैं।

1. तौनी आउल (गहरे पीले रंग का उल्लू)

यह एक ऐसा जानवर है, जो जलवायु परिवर्तन की वजह से बदल रहा है। यह यूरोप में पाया जाने वाला साधारण उल्लू है।

कहा जाता है कि यह उल्लू दो रंगों में पाया जाता है, एक भूरा रंग और दूसरा ग्रे रंग में। ग्रे पंखों वाले उल्लू ठंडी जगहों पर पाए जाते हैं और भूरे पंखों वाले उल्लू बर्फीले पर्यावरण में पाए जाते हैं।

2. हाइब्रिड माइस (संकर चूहा)

एक ठेठ जर्मन चूहे और एलजीरियन चूहे, जिनपर जहर का असर नहीं होता, के प्रजनन से हाइब्रिड माउस का जन्म होता है।

इस चूहे पर भी जहर का असर नहीं होता। अधिकतर संकर जानवर जन्म देने की शक्ति खो देते हैं, पर इन लंबी उम्र वाले चूहों में ऐसी कोई समस्या नहीं आती।

3. ग्रीन लिज़र्ड (हरी छिपकली)

जब से भूरी छिपकलियां हरी छिपकलियों के जगहों पर अतिक्रमण करने लगी हैं, तब से हरी छिपकलियां इनके अनुकूल पेड़ के ऊपरी हिस्सों में जा कर रहने लगीं। अच्छी तरह से चढ़ने के लिए उनके शरीर का आकार बहुत ही कम समय में (करीब 20 सालों में) बदल गया।

अब इन छिपकली की पैरों की उंगलियों पर बड़े-बड़े पैड्स और चिपचिपी परतें आ गई हैं, जो उन्हे मज़बूत पकड़ बनाए रखने में सहायता प्रदान करता है।

4. बेड बग्स (खटमल)

इस प्राणी में जो परिवर्तन आया है, वह जानवरों के लिए अच्छा है, पर इंसानों के लिए बुरा।

मनुष्य इनसे छुटकारा पाने हेतु अधिक मात्रा में रसायन का इस्तेमाल करते हैं और इस वजह से खटमल ने गहरे मोटे कवच और मज़बूत तंत्रिकाएं विकसित कर ली हैं ।


5. पैपर्ड मोथ (पतंगा)

यह जानवरों के विकास का सबसे मशहूर उदाहरणों में से एक है। पतंगे दो प्रकार के होते हैंः एक हलके रंग और चितकबरे रूप में और दूसरे काले रंग और ठोस बनावट के रूप में।

औद्योगिक क्रांति से पहले कालेे रंग के पतंगे केवल दो प्रतिशत थे, पर बाद में ये बढ़ते गए। माना जाता है कि ऐसा प्रदूषण की वजह से हुआ है।

6. बैंडेड स्नेल्स (घोंघे)

इनके दो रंग के कवच होते हैंः हल्का पीला या भूरा। वर्ष 1960 में लिए गए घोंघों के नमूनों की जब 2010 के नमूनों के साथ तुलना की गई, तो पाया गया कि हल्के रंग के कवच वाले स्नेल्स बढ़ रहे हैं, क्योंकि तापमान में पहले के मुकाबले अधिक वृद्धि हुई है।

हल्के रंग के शेल्स उनको ठंडा रखने में सहायक सिद्ध होते हैं।

7. इतालियन वॉल लिज़र्डस (दीवाल पर चढ़ने वाली छिपकली)

वैज्ञानिकों का कहना है, प्राकृतिक बदलाव के कारण, यह कीटों को खाने की जगह पौधों का सेवन करने लगे।

इन छिपकलियों ने लंबे सिर और सेकल वॉल्व विकसित कर लिए। यह वॉल्व इनकी आंतों को नई डाइट के अनुकूल बनाता है।

8. पिंक साल्मन (साल्मन मछली)

वैज्ञानिकों का कहना है कि आजकल जलवायु परिवर्तन की वजह से पिंक साल्मन कुछ हफ्ते पहले ही विस्थापित हो जाते हैं, पर आज से 40 साल पहले ऐसा नहीं था ।

जब शोधकर्ताओं ने मछलियों की जनसंख्या का करीब से अध्य्यन किया, तो वह यह जान के चकित रह गए कि उन में अनुवांशिक परिवर्तन भी आए हैं। अभी उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि इसका लंबे समय में क्या असर पड़ेगा, लेकिन उनको संदेह है कि इसका प्रभाव मछलियों के उद्योग पर पड़ेगा।

फोटो साभारः Mother Nature Network

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