इनकी बल्लेबाजी की नकल करते थे सचिन तेंदुलकर, आज यह रहते हैं छोटे से चॉल में

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10:49 am 27 Oct, 2016

इस जिंदगी का खेल भी निराला है, कब, कहां और कैसे एक इंसान की तकदीर फर्श से अर्श तक पहुंच जाए या फिर कहें अर्श से फर्श तक पहुंच जाए, कोई नहीं जानता।

सचिन तेंदुलकर, क्रिकेट जगत का एक ऐसा नाम, जिन्होंने महज 16 साल की उम्र में अपने क्रिकेट के सफर की शुरुआत की। सचिन आज जिस मुकाम पर हैं, इसके पीछे उनकी कड़ी मेहनत तो है ही साथ ही कुछ खास लोगों का विशेष योगदान रहा है।

सचिन को एक विश्वस्तरीय क्रिकेटर बनाने में उनके बड़े भाई अजित तेंदुलकर ने दिन-रात एक कर दिया।

सचिन जब भी क्रिकट का अभ्यास करते उस वक्त उनके बड़े भाई अजित, भाई कम एक कोच की भूमिका अदा करते। यहां तक कि अजित ने शादी तक नहीं की, ताकि वह सचिन को उनके अभ्यास में पूरा समय दे सके।

sachin

सचिन के एक अभ्यास के दौरान उनके भाई अनिल मौजूद indiatimes.

वहीं, क्रिकेट के द्रोणाचार्य कह जाने वाले सचिन के कोच गुरु रमाकांत आचरेकर ने सचिन को क्रिकेट की बारीकियों को सिखाया और उन्हें इस खेल में पारंगत बनाया।

लेकिन एक और शख्स है जिसकी बल्लेबाजी देखकर सचिन उन्ही की तरह शॉट लगाने का प्रयास किया करते थे। मुम्बई के दादर में स्थित शारदाश्रम स्कूल से निकलने के बाद सचिन अपने बचपन के दोस्त रहे विनोद काम्बली के साथ शिवाजी पार्क के मैदान मे क्रिकेट का अभ्यास करने के लिए जाया करते थे।

आचरेकर के निरिक्षण में अभ्यास करने वाले सचिन, मैदान में मौजूद एक खिलाड़ी को देख उनकी तरह ही बल्लेबाजी करने का अभ्यास करते। उस खिलाड़ी का नाम है अनिल गुरव। यह एक ऐसा नाम है, जिसकी बल्लेबाजी की तकनीक के कायल खुद सचिन के गुरु रमाकांत आचरेकर भी रहे हैं।

anil gurav

अनिल गुरव Facebook

रमाकांत आचरेकर ने एक बार कहा था कि सचिन ने हमेशा से ही अनिल गुरव की बल्लेबाजी तकनीक की नकल करने का प्रयास किया।

उस वक्त के मुंबई के विवियन रिचर्ड्स कहे जाने वाले अनिल गुरव मुंबई अंडर-19 के लिए खेला करते थे। अनिल के बारे में उनके साथियों और कोच का कहना था कि यह लड़का एक दिन भारत का प्रतिनिधितत्व जरूर करेगा।

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आज अनिल अपने मोहल्ले के बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते हुए उन्हें क्रिकेट की बारीकियों से रूबरू कराते हैं।financialexpress

एक बार का वाकया ऐसा है कि सचिन, अनिल गुरव के बैट से बल्लेबाजी करना चाहते थे, लेकिन सचिन स्वभाव के शर्मीले थे, वह उनसे अपनी यह इच्छा जाहिर नहीं कर पाए। एक दिन वानखेड़े स्टेडियम के स्कोरर रमेश परब ने अनिल गुरव को सचिन की इस ख्वाहिश के बारे में बताया। तब अनिल, सचिन के पास गए और कहा कि अगर सचिन ने अगले मैच में सैकड़ा जड़ा तो यह बल्ला उनका हो जाएगा।  फिर क्या सचिन ने अगले मैच में 118 रन बनाए और वह बल्ला उन्हें मिल गया जो आज भी उनके पास है।


लेकिन तकदीर का खेल देखिए जिस खिलाड़ी से सबको उम्मीद थी कि वह एक दिन भारतीय क्रिकेट टीम का चमकता सितारा बनेगा, वह आज एक छोटे से चॉल में अपना जीवन-यापन कर रहा है।

जहां सचिन के बड़े भाई अजित उनके पहले गुरु रहे, उसी तरह अनिल का भी एक बड़ा भाई था, जिनका नाम भी अजित ही था, अजित गुरव।  लेकिन इस अजित ने अपने छोटे भाई अनिल का क्रिकेट करियर तबाह कर दिया। अनिल के बड़े भाई अजित के तार अंडरवर्ल्ड से जुड़े थे। आए दिन चोरी, बैंक लूटने और हत्या में उसका नाम संलिप्त पाया जाता। अनिल और उनकी मां को अक्सर पुछताछ के लिए पुलिस थाने के चक्कर लगाने पड़ते।

कई बार तो ऐसा हुआ कि महत्वपूर्ण मैचों के दौरान पुलिस वक्त-बेवक्त बुला लिया करती। रोज के इस अपमान से अनिल टूट चुके थे। उन्हें इस कदर चोट लगी कि वह कभी इससे उबर ही नहीं पाए और शराब की बुरी लत ने उन्हें घेर लिए। हाथों में बल्ले की जगह शराब की बोतल ने ले ली।

क्रिकेट में नाम कमाने के बाद जब सचिन मिले अनिल से

अनिल की सचिन से आखिरी मुलाकात इसलाम जिमखाना क्लब मे 1990 के शुरूआती महीनों में हुई थी। चारों तरफ से बॉडी गार्ड से घिरे सचिन ने वहां एक कोने में खड़े अनिल को झट से पहचान लिया। उनसे गले मिलकर, बातचीत कर, अनिल को अपने घर आने का न्योता दिया, लेकिन अनिल की झिझक ने उन्हें वहां जाने की अनुमति नहीं दी, उन्होंने कभी सचिन से मिलने की कोशिश भी नहीं की।

सचिन तेंदुलकर जहां क्रिकेट जगत के सितारे बन गए, वहीं अनिल कहीं पीछे छूट गए। आज अनिल, मुंबई से सटे नालासोपारा में स्थित एक चॉल में 10×15 फिट के एक छोटे से कमरे में रहते है।

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