प्राचीन मिस्र के बारे में 21 तथ्य जो आपने शायद ही कभी सुने होंगे

author image
4:31 pm 21 May, 2016

मिस्र यूं तो फराओ, पिरामिड और ममी के लिए मशहूर है। यहां की दंतकथाओं के बारे में जितना अधिक पता चलता है, हम उतने ही ज्यादा अचंभित होते हैं। हालांकि, हम यहां जो कुछ भी जानकारियां देने जा रहे हैं, उनके बारे में आपको शायद ही पता होगा।

1. प्राचीन मिस्र के निवासी बालों से नफरत करते थे।

नफरत भी ऐसी के दो दुश्मनो की नफरत भी फीकी नज़र आए। उनका मानना था कि शरीर पर बाल होना स्वास्थ के लिए हानिकारक है। हर तरह के बाल को साफ़ कर दिया जाता था। उनके चित्रों और उत्कीर्णों में जो बाल है, वे दरअसल विग हैं।

संभावित तौर से ये विग टोपी की तरह पहनी जाती थी, ताकि सूर्य से बचाव हो सके। विग का बालों से कोई लेना-देना नहीं था।

2. मिस्र के सभी लोग “मेक अप ” करते थे।

मिस्त्र में मेकअप करना अनिवार्य था। उनका मानना था कि हरा और काला सूरमा उन्हें सूर्य की किरणों, मक्खियों तथा हानिकारक संक्रमणों से बचाए रखता था। यह होरस (सूर्यदेव) को श्रंद्धांजलि व नमन देने का एक तरीका भी था।

रामसेस-3 के अधीन काम करने वाले मज़दूरों ने सिर्फ इसलिए काम छोड़ दिया था, क्योंकि उन्हें उपयुक्त बाम और मालिश वाला तेल नहीं दिया गया था।

3. मुंह की स्वछता उनके लिए महत्त्वपूर्ण थी।

माना जाता है कि प्राचीन मिस्र के निवासियों ने ही एक तरह की टूथपेस्ट की शुरुआत की थी। इसे बनाने में वे बैल के खुरों का पाउडर, जले हुए अंडे की छाल तथा राख के मिश्रण का प्रयोग करते थे।

दांतों की स्वछता इतनी महत्त्वपूर्ण थी के वे मम्मियों को टूथ पिक के साथ दफनाते थे।

4. फराओ के साथ उनके नौकरों को भी दफनाया जाता था।

मिस्र में फराओ के देहान्त होने पर उनके साथ जिन्दा नौकरों को भी दफना दिया जाता था। उनके नौकरों को सिर पर मार कर बेहोश किया जाता था और दफना दिया जाता था।

5. एक समय मिस्र के अधिकतर निवासी ईसाई थे।

सन 400 से 800 के बीच मिस्र के अधिकतर लोग ईसाई थे। 10वीं सदी के मध्य में मुसलमानों के हमले के बाद यहां बड़ी संख्या में लोगों का धर्म परिवर्तन हुआ और लोगों ने इस्लाम कबूल कर लिया।

बाद में उनकी कॉप्टिक भाषा की जगह भी अरबी ने ले ली।

6. क्लियोपैट्रा वंश अनुसार मिस्र की नहीं थी।

अलेक्जेंड्रिया में जन्मी हुई क्लियोपैट्रा यूनानी परिवार मक्लोडिया से ताल्लुक रखती थीं। क्लियोपैट्रा टॉलेमी वंश की पहली सदस्य थी जो कि मिस्र की भाषा बोल सकती थीं।

7. प्राचीन मिस्र की महिलाओं को काफी आजादी थी।

पूरी दुनिया के विपरीत मिस्र की महिलाएं जमीन खरीद सकती थीं, जज बन सकती थीं और अपनी वसीयत लिख सकती थीं। अगर वह बाहर काम करती थी तो उन्हें समान वेतन दिया जाता था। वह तलाक भी दे सकती थीं और फिर से शादी भी कर सकती थीं।

वह शादी से पहले कॉन्ट्रैक्ट भी कर सकती थीं, जिसमें वह शादी में लाई गई वस्तुओं के बारे में विमर्श कर सकती थीं।

8. फराओ मोटे हुआ करते थे।

प्राचीन मिस्र के चित्र भले ही फराओ को पतला और तन्दुरुस्त दिखाते हैं, लेकिन ममियों के परीक्षण के बाद यह सामने आया है कि फराओ की कमर चौड़ी होती थी।

उनकी खुराक में शराब, शहद, बीयर तथा ब्रेड और अधिक चीनी वाले पदार्थ थे। उनमें से की मधुमेह के शिकार भी थे।

9. प्राचीन मिस्र के पास दुनिया की पहली शांति संधि का रिकॉर्ड है।

200 सालों के बाद भी मिस्र वासियों और हित्तीट्स के बीच की लड़ाई का कोई नतीजा नहीं निकला। 1259 में दोनों राज्यों को एक दूसरे से खतरा था।

रामसेस और हततुसिलि-3 ने एक शांति संधि की और यह वादा किया कि वह किसी भी तीसरे आक्रमणकारी के खिलाफ एक-दूसरे की मदद करेंगे ।

10. मिस्र के निवासी गणित में तेज थे।

मिस्र के निवासी गणित में काफी तेज थे। उनके द्वारा बनाए गए संरचनाओं से यह साबित होता है कि गणित और वास्तुकला में वे बेहद आगे थे।

11. वे विचित्र शकल वाले लोगों को नौकरी पर रखते थे।


प्राचीन मिस्र में बौना पैदा होना खुशकिस्मत माना जाता था, क्योंकि वह आपको नौकरी दिला देता था और वह भी सोने के कारखाने में। विचित्र शक्ल वाले लोग जल्दी से पहचान में आ जाते थे, इसलिए उनको पकड़ना आसान होता था।

12. बनाया सबसे पहला गर्भ-प्रतिरोधक।

गर्भधारण से बचने के लिए प्राचीन मिस्रवासी मिट्टी, शहद और मगरमच्छ के गोबर का मिश्रण बनाते थे और उसको महिला की योनि में डालते थे।

मगरमच्छ का गोबर एसिडिक होता है, जो शुक्राणुओं को मारता है।

13. तापमान के बारे में थी सटीक जानकारी।

मिस्र गर्म जगह है, जहां तापमान 114 डिग्री तक पहुंच जाता है। इस गर्म वातावरण में भी गीज़ा के पिरामिड का तापमान 68 डिग्री ही रहता है। और तो और पृथ्वी का औसत अंदरूनी तापमान भी 68 डिग्री ही है।

14. वे अपनी बिल्लियों से प्यार करते थे।

अगर इस दुनिया में कोई जानवर ऐसी भक्ति पैदा कर सकता है, तो वह बिल्ली ही है। प्राचीन मिस्र में बिल्लियों का एक अलग स्थान था। जब भी उनकी पालतू बिल्ली मर जाती थी, तो वे अपनी भौंहें शेव कर देते थे। वे बिल्लियों की ममी बनाते थे और उन्हें चूहों और एक कटोरी दूध के साथ दफनाया जाता था।

15. प्राचीन मिस्र के डॉक्टरों के पास विशेषज्ञता थी।

अन्य डॉक्टरों के विपरीत मिस्र के डॉक्टर एक ही अंग का अध्ययन करते थे। इतिहासकार हेरोडोटस ने लिखा कि कैसे एक चिकित्सक एक ही बीमारी का विशेषज्ञ था और कुछ नहीं। उनके पास हर एक चिकित्सक का अलग नाम था।

इनमें से सबसे रोचक नाम था “शेफर्ड ऑफ़ द अनस”।

16. पिरामिड गुलामो द्वारा नहीं बनवाया गया था।

हालांकि, पिरामिड बनाने का काम बहुत ही मुश्किल रहा होगा, परंतु सबूत दर्शाते हैं कि काम करने वाले लोग गुलाम नहीं थे। वह कलाकार थे, जिनका नाम इन स्मारकों के नीचे लिखा हुआ नजर आता है।

17. प्राचीन मिस्र के कारीगरों ने दुनिया की पहली हड़ताल की शुरुआत की।

रॉयल नेक्रोपोलिस बिल्डिंग पर काम करने वाले कारीगरों को जब उन के हिस्से का अनाज नहीं मिला, तो उन्होंने पास के मंदिर में जाकर शरण ली और काम करने से मना कर दिया।

18. मम्मी बनाने के दौरान दिल नहीं निकाला जाता था।

अब तक सबको पता है कि मुर्दे को पट्टी बांधने से पहले उसके अंदरुनी अंग निकाले जाते थे, उसका दिमाग उसके नाक से निकाला जाता है। इन अंगो को एक उपकरण में रखा जाता है। परन्तु दिल को नहीं निकाला जाता था, क्योंकि उसे आत्मा का प्रतीक माना जाता था।

19. फराओ हत्शेप्सुत इतिहास से लगभग निकाले जा चुके थे।

मिस्र पर राज करने के लिए फराओ हत्शेप्सुत ने कई जतन किए थे। माना जाता है कि उनके बाद को फराओ ने उनके स्मारकों को मिटाकर उन्हें इतिहास से निकालने का पूरा प्रयास किया।

20. गिज़ा का मशहूर पिरामिड ओराइयन की बेल्ट के साथ संरेखित है।

गिज़ा का पिरामिड पृथ्वी के भूभाग के बीचोबीच है। इस बात पर कई बार बहस हो चुकी है। ओराइयन को मिस्र के पुनर्जनम के देवता ऑसिरिज़ से भी जोड़ा जाता था।

21. अभी तक के सारे पिरामिड लूटे जा चुके हैं।

माना जाता है की तुतनखामन की मृत्यु के तुरंत बाद उनका पिरामिड लूटा गया और लुटेरों ने पकड़े जाने के बाद अपनी वापसी मे एक बड़ा थैला गिरा दिया। थैले मे पाए गये बड़े त्रिकोण नियॉन की तरह चमकते थे, जो कि ख़ज़ाने की तरफ रास्ता दिखाते थे।

Discussions



TY News