इन रियल लाइफ हीरोज ने 1.7 लाख भारतीयों को किया था ‘एयरलिफ्ट’

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11:42 pm 30 Jan, 2016

जैसा कि अक्षय कुमार की फिल्म ‘एयरलिफ्ट’ में प्रदर्शित किया गया है कि किस तरह से एक बिज़नेस टाइकून रंजीत कत्याल 1990 में हुए कुवैत-इराक युद्ध के दौरान वहां फंसे भारतीयों को निकालने में मदद करता है। लेकिन वास्तविकता इससे परे है। हकीकत में उस वक़्त रंजीत कत्याल नाम का कोई शख्स था ही नहीं।

वहीं विदेश मंत्रालय ने एयरलिफ्ट फिल्म को मनोरंजक लेकिन तथ्यों के कमी के कारण अधूरी फिल्म करार दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने यह ट्वीट किया:

विदेश मंत्रालय ने मुख्य बिन्दुओं पर गौर करते हुए कहा-

“फिल्म के लिए इस तरह की थीम का चुना जाना ही दिखाता है कि यह कितना महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्रालय विदेशों में रहने वाले और काम करने वाले भारतीय नागरिकों के हितों, चिंताओं और सुरक्षा को अपनी सबसे पहली जिम्मेदारी समझते हैं। हम अतीत में यह साबित कर चुके हैं और भविष्य में भी करते रहेंगे। यह एक फिल्म है और फिल्मों में अकसर वास्तविक घटनाक्रमों, तथ्यों के मामले में आजादी ली जाती है। इस फिल्म में भी 1990 में कुवैत में जो हुआ, उसके घटनाक्रम को दर्शाने में कलात्मक स्वतंत्रता ली गई है। जिन्हें भी 1990 का यह घटनाक्रम याद होगा, उन्हें विदेश मंत्रालय की अग्रसक्रिय भूमिका भी याद होगी। सरकारी प्रतिनिधिमंडल को बगदाद और कुवैत भेजा गया था और नागरिक उड्डयन मंत्रालय, एयर इंडिया और कुछ अन्य सरकारी विभागों के साथ जबरदस्त तालमेल किया गया था।”

अक्षय कुमार अभिनीत इस फिल्म में विदेश मंत्रालय कुवैत मिशन के शुरू में निष्क्रीय भूमिका में दिखाया गया है। जबकि हकीकत यह है कि बिना भारत सरकार की सक्रियता के इतने बड़े मिशन को अन्जाम नहीं दिया जा सकता था। वास्तविकता, फिल्म में दिखाई गई पटकथा से अलग है।

तो आखिरकार वह लोग कौन थे जिन्होंने इतने बड़े मिशन को सच में ‘एयरलिफ्ट’ किया था? यहां हम आपको बता रहे हैं, उन लोगों के बारे में जो कुवैत में फंसे भारतीयों के लिए रियल लाइफ हीरोज साबित हुए थे।

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एयर इंडिया की फ्लाइट पर चढ़ते भारतीय divyamarathi

कैप्टन विजय नायर

वह एयर इंडिया के उन अफसरों में से एक थे, जिनकी निगरानी में वहां फंसे भारतीयों को जॉर्डन से भारत लाया गया था।

माइकल मास्करेन्हास

माइकल ने अपने दो प्रतिनिधियों के साथ मिलकर एयरलिफ्ट मिशन का प्रतिनिधित्व किया था। वह 1990 में गल्फ और मिडिल ईस्ट में एयरलाइंस के तत्कालीन रीजनल डायरेक्टर थे।

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बाएं से दूसरे कैप्टन विजय नायर और उनके दाएं ओर खड़े माइकल मास्करेन्हास के साथ इंडियन एम्बेसी के अधिकारी cloudfront

टोनी जशनमाल


टोनी उस कंपनी के मुखिया थे, जो वहां फंसे भारतीयों को खाना उपलब्ध कराती थी। वह खुद प्रतिदिन जॉर्डन से इंडिया जाने वाले विमानों को नियमित किया करते थे। अपने एक इंटरव्यू में टोनी ने बताया था:

“भारत से कई फूड मर्चेंट हमारे संपर्क में थे और वे हमें जरूरी फूड प्रोवाइड करा रहे थे। हम चावल, तेल, चीनी, चाय और दाल सहित दस तरह के प्रोडक्ट्स के पैकेट बनवाते थे। यह पैकेट चार लोगों के परिवार के लिए आधे से एक महीने के लिए पर्याप्त थे।”

टोनी बताते है कि शुरुआत में कुछ दिक्कतें ज़रूर आई, लेकिन बहरीन, दुबई और कतर में मौजूद भारतीय कमेटियों ने इस मिशन में भरपूर सहयोग किया।

के टी बी मेनन

के टी बी मेनन कुवैत में भारतीय मूल के सबसे अमीर आदमी थे। उन्होंने तत्कालीन भारतीय डिप्लोमेट के पी फेबियन को संपर्क कर उनसे भारतीयों को निकालने में खुद मदद देने की बात कही थी। गौरतलब है कि के टी बी मेनन भारत से कुवैत जाने वाले तीसरे भारतीय थे।

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के टी बी मेनन बाएं तरफ racingpulse

इंद्र कुमार गुजराल

इंद्र कुमार गुजराल तत्कालीन विदेश मंत्री थे। उन्होंने सद्दाम हुसैन से मुलाकात कर वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षित भारत निकासी के लिए मदद मांगी थी। उन्होंने अपने महत्वपूर्ण बिंदु सद्दाम हुसैन के समक्ष रखे, जिसके बाद सद्दाम हुसैन मदद के लिए राज़ी हो गए। वहीं गुजराल के बेटे ने ही इस ऑपरेशन का ब्लूप्रिंट तैयार किया था। इराक के पास खाद्य-आपूर्ति का पर्याप्त प्रबंध नहीं था, इसलिए सद्दाम वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षित निकासी के लिए तैयार हो गए।

के पी फेबियन

के पी फेबियन एयरलिफ्ट मिशन में दिन-रात लगे लोगों से को-ऑर्डिनेट किया करते थे। वहीं एयर इंडिया के कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने का ज़िम्मा भी उन्होंने उठाया।

सनी मैथ्यू

सनी मैथ्यू ने भारतीयों के ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था का ज़िम्मा अपने ऊपर लिया था। उन्होंने ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था के साथ ही कई भारतीयों को पैसे भी दिए ताकि आगे सफर में कोई दिक्कत न आए। रास्ते में खाने-पीने की व्यवस्था का इंतज़ाम भी उन्होंने ही कराया था। सनी मैथ्यू ने बस ऑपरेटरों से संपर्क साधे और भारतीयों को निकालने में सक्रिय भूमिका निभाई।

Sunny Mathew and his wife

सनी मैथ्यू अपनी पत्नी के साथ indiatimes

हरभजन सिंह वेदी

हरभजन सिंह वेदी को वहां फंसे भारतीयों के पासपोर्ट और सफर से जुड़े दस्तावेज जारी करने की जिम्मेदारी दी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीयों की सुरक्षित भारत निकासी के लिए वेदी ने 51 सदस्यीय अनौपचारिक समिति का गठन किया था।

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