14 साल की इस लड़की ने जीती मौत के बाद ‘ज़िंदा’ रहने की जंग

5:26 pm 22 Nov, 2016


इस दुनिया में रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा लौकिक सत्य है कि यहां हर इंसान की मृत्यु निश्चित है। लेकिन एक लड़की ने कुदरत के इस सबसे बड़े सच का अलग तरह से सामना किया।

ब्रिटेन की रहने वाली 14 साल की एक लड़की लाइलाज बीमारी कैंसर से पीड़ित थी। उसे पता था कि वह मरने वाली है लेकिन वह मरना नहीं चाहती थी। वह मरने के बाद भी एक दिन जीवित होने के रास्तों को खोजने में जुटी थी। ऐसे में उसने  क्रायोनिक प्रक्रिया के तहत अपने आप को जिन्दा रखने की ख्वाहिश अपने माता-पिता को बताई। अपनी इस अनोखी अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए उसने कानून का दरवाजा भी खटखटाया और कोर्ट ने लड़की की अपील पर अपनी मुहर लगा दी।

लड़की ने ब्रिटेन के एक जज को अपनी लिखी एक चिट्ठी में कहाः


“मैं जीना चाहती हूं और लंबे समय तक जीना चाहती हूं। मुझे उम्मीद है कि भविष्य में कैंसर से मुक्ति मिल जाएगी। उस दिन वे मुझे जगा सकते हैं, ताकि मैं फिर से जिंदा हो सकूं।”

आपको बता दें कि क्रायोनिक प्रक्रिया में शव को 0 से 196 डिग्री तापमान में रखा जाता है, ताकि इंसानी दिमाग सुरक्षित रखा जा सके। यह प्रक्रिया इंसान के मौत होने के 2 मिनट से लेकर अधिकतम 15 मिनट के भीतर शुरू कर दी जाती है। साथ ही इस प्रक्रिया के अन्तर्गत शरीर को तरल नाट्रोजन में ठंडा करते है, ताकि भविष्य में बीमारी दूर होने पर फिर से जीवित होने की संभावना बन सके।

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इन्ही टैंकों में रखे जाते हैं शव wordpress.

कैंसर की बिमारी से जूझ रही इस लड़की की हाल ही में मौत हो गई है। इस विशेष प्रक्रिया को अपनाकर, भविष्य में कैंसर का इलाज संभव होने के बाद अपने जीवित होने की सम्भावना पर इस लड़की ने जज को लिखे अपने पत्र में यह भी लिखा था किः

“क्रायोप्रिजर्व होने से मुझे इलाज का मौका मिल सकता है और मैं इस मौके को खोना नहीं चाहती हूं। इस प्रक्रिया के तहत मैं सैकड़ों साल बाद भी बीमारी का इलाज आ जाने के बाद अपना जीवन पा सकती हूं।”

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एक लैब जहां शवों को फ्रीज और विशेष टैंकों में डालने के लिए तैयार किया जाता है। dailymail

क्रायोनिक्स तकनीक द्वारा शवों को सुरक्षित रखने की इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 32 लाख रुपए का खर्च आता है। अभी यह सुविधा अमेरिका और रूस में है। ब्रिटेन में यह सुविधा नहीं है। यही वजह है कि लड़की के शव को अमेरिका मिशिगन स्थित क्रायोनिक्स इंस्टीट्यूट ले जाया गया है। जहां क्रायोनिक्स तकनीक के मदद से लाइलाज बीमारियों से मरने वाले लोगों के शव को डीप फ्रीज कर सुरक्षित रखा जाता है।

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इस टैंक में रखा गया है 14 वर्षीय लड़की का शव, जिसके नाम को उजागर न करते हुए नाम दिया गया है ‘पेशेंट 143’ dailymail

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